नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर करते हुए तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुली चुनौती दे दी है। कबीर ने खुद को ‘बंगाल का ओवैसी’ बताते हुए दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह गेमचेंजर की भूमिका निभाएंगे और तृणमूल के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाएंगे।
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के निर्माण की आधारशिला रखने के बाद पार्टी से निलंबित किए गए हुमायूं कबीर ने अब नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसी महीने राज्य में सक्रिय हो जाएगी और वह 135 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।
नई पार्टी का ऐलान, ओवैसी से संपर्क का दावा
प्रेस कांफ्रेंस में हुमायूं कबीर ने कहा, मैंने असदुद्दीन ओवैसी से बात की है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि वह हैदराबाद के ओवैसी हैं और मैं बंगाल का ओवैसी हूं। मैं 10 दिसंबर को कोलकाता पहुंचूंगा, 12 दिसंबर को लाखों समर्थकों की मौजूदगी में अपनी पार्टी का औपचारिक शुभारंभ करूंगा। कबीर ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी मुस्लिम समाज के हक और अधिकारों के लिए काम करेगी। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि उनका उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम समर्थन को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन उनके अगले बयानों ने इस दावे पर सवाल भी खड़े कर दिए।
‘तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक होगा खत्म’
रविवार को दिए गए एक अन्य बयान में हुमायूं कबीर ने साफ शब्दों में कहा, मैं एक नई पार्टी बनाऊंगा जो मुसलमानों के लिए काम करेगी। मैं 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा और बंगाल चुनाव में गेमचेंजर बनूंगा। तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म हो जाएगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है और इसका बड़ा हिस्सा अब तक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार माना जाता रहा है। ऐसे में कबीर का यह बयान सत्तारूढ़ दल के लिए भारी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
AIMIM के साथ गठबंधन के संकेत, ओवैसी की चुप्पी
हुमायूं कबीर ने यह भी दावा किया कि वह AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के संपर्क में हैं और चुनाव में उनके साथ मिलकर उतर सकते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक AIMIM या असदुद्दीन ओवैसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक हलचल तेज, तृणमूल की बढ़ी चिंता
कबीर के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हुमायूं कबीर वाकई AIMIM के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है, जिसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है।
हालांकि यह भी देखना अहम होगा कि कबीर की नई पार्टी को ज़मीनी स्तर पर कितना समर्थन मिलता है और ओवैसी वास्तव में उनके साथ खड़े होते हैं या नहीं।




