नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का कैबिनेट विस्तार कर दिया गया है। इस विस्तार में 5 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। लंबे समय से खाली चल रहे पदों को भरते हुए सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
किन विधायकों को मिला मंत्री पद?
कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को शामिल किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: खजान दास (राजपुर, देहरादून), प्रदीप बत्रा (रुड़की, हरिद्वार), मदन कौशिक (हरिद्वार), राम सिंह कैड़ा (भीमताल, नैनीताल). भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग) इस कैबिनेट विस्तार में सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा गया है 2 ठाकुर 1 ब्राह्मण 1 पंजाबी 1 अनुसूचित जाति (SC) इससे साफ है कि सरकार ने अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
किस नेता का क्या बैकग्राउंड?
खजान दास
देहरादून की राजपुर सीट से विधायक हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं। संगठन में भी इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
प्रदीप बत्रा
रुड़की से तीन बार के विधायक हैं और पंजाबी समाज से आते हैं। बीजेपी संगठन में भी इनकी अच्छी पकड़ है।
मदन कौशिक
हरिद्वार से पांच बार के विधायक हैं और बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं। पहले प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
राम सिंह कैड़ा
भीमताल से विधायक हैं। छात्र राजनीति से शुरुआत की और पहले कांग्रेस से भी जुड़े रहे।
भरत चौधरी
रुद्रप्रयाग से विधायक हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। इन्होंने संस्कृत में शपथ लेकर खास संदेश दिया।
क्यों जरूरी था कैबिनेट विस्तार?
कैबिनेट में कुछ पद खाली चल रहे थे 2023 में मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद एक पद खाली हुआ वहीं प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद संख्या और कम हो गई इसी वजह से कैबिनेट विस्तार जरूरी हो गया था। इस विस्तार के जरिए सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की अलग-अलग समाज को प्रतिनिधित्व दिया संगठन और अनुभव दोनों को महत्व दिया धामी सरकार का यह कैबिनेट विस्तार राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नए मंत्रियों की भूमिका राज्य की नीतियों और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।




