हरिद्वार, 03 मार्च (हि.स.)। पेशवाई के दौरान पहली बार हरिद्वार में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक ढोल-दमाऊ की झलक दिखी। ढोल-दमाऊ की थाप पर साधु-संत नाचे। कुंभ की पेशवाई के दौरान साधु-संतों का हर रंग-रूप दिखाई दिया। यह पहली बार हुआ कि पेशवाई में उत्तराखंड के ढोल-दमाऊ के साथ-साथ छोलिया नृत्य हुआ। 40 से अधिक कलाकारों का यह समूह पेशवाई के शुरुआती चरण में आगे रहा। छोलिया नृत्य के प्रमुख मोहन दा का कहना है कि पहली बार उन्हें कुंभ में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को पेशवाई में दिखाने का मौका मिला। उत्तराखंड के कलाकारों ने पेशवाई को मनमोहक बनाया। मोहन दा का कहना है कि सिर्फ निरंजनी अखाड़े से ही नहीं अन्य तमाम अखाड़ों से उन्हें इस बार बुलावा आया है। वह तैयारी के साथ पूरे कुंभ के दौरान हरिद्वार में ही रहेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/मुकुंद




