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Tuesday, March 24, 2026
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UP Fuel Shortage: यूपी में 17–18 दिन का पेट्रोल-डीजल स्टॉक, इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख संजय भंडारी का बड़ा दावा

ईरान-इजरायल तनाव के बीच यूपी में पेट्रोल-डीजल की कमी की आशंका पर इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख संजय भंडारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 17-18 दिन का ईंधन स्टॉक मौजूद है और सप्लाई सामान्य है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। Uttar Pradesh में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर लोगों के मन में चिंता बढ़ रही है। खासकर Iran–Israel conflict के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में ईंधन की सप्लाई प्रभावित होगी। इसी बीच Indian Oil के राज्य प्रमुख और स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर Sanjay Bhandari ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

प्रदेश में 17–18 दिन का पेट्रोल-डीजल स्टॉक

संजय भंडारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 13,000 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। इन पेट्रोल पंपों पर आमतौर पर 4 से 5 दिन का ईंधन स्टॉक मौजूद रहता है। इसके अलावा राज्य के 32 डिपो टर्मिनलों पर लगभग 10 से 12 दिन का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। इस तरह कुल मिलाकर प्रदेश में 17 से 18 दिन का पेट्रोल-डीजल भंडार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि सप्लाई लाइन पूरी तरह से मेंटेन है और ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।

LPG सप्लाई को लेकर भी दिया भरोसा

एलपीजी को लेकर भी अधिकारियों ने स्थिति साफ की है। उत्तर प्रदेश में 4100 से अधिक LPG डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं। हर डिस्ट्रीब्यूटर के पास सामान्य रूप से 1 से 2 दिन की इन्वेंट्री रहती है, जबकि बॉटलिंग प्लांट में 3 से 4 दिन का स्टॉक मौजूद रहता है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था सामान्य दिनों में भी इसी तरह रहती है।

LPG रिफिल की समय सीमा 25 दिन

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए एलपीजी सिलेंडर की रिफिल समय सीमा 25 दिन तय की गई है। इसके साथ ही अब DAC (Delivery Authorization Code) के बिना गैस सिलेंडर नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस केवल असली उपभोक्ताओं तक ही पहुंचे और किसी तरह का दुरुपयोग न हो।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर

अधिकारियों के अनुसार भारत में इस्तेमाल होने वाली LPG का करीब 65–70% हिस्सा आयात किया जाता है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। मौजूदा तनाव के कारण कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित न होने देने के लिए सरकार और तेल कंपनियां जरूरी कदम उठा रही हैं। जिन स्थानों से गैस की आपूर्ति होती है वहां उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।

जरूरी सेवाओं को दी जाएगी प्राथमिकता

अगर जरूरत पड़ी तो नॉन-एसेंशियल सेक्टर की आपूर्ति अस्थायी रूप से कम की जा सकती है, लेकिन अस्पताल, स्कूल और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि पैनिक बायिंग से बचें और ईंधन का दुरुपयोग न करें, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक सही तरीके से आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

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