ट्रेनी टीचर भर्ती में शेष अभ्यर्थियों की फिर से काउंसलिंग निर्देश के खिलाफ सरकार व बोर्ड ने दाखिल की अपील

दोनों अपीलों पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा एवं जस्टिस एस क्यू एच रिजवी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 2 दिन की बहस के बाद कोर्ट ने इन अपीलों पर फिर से सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
बेसिक शिक्षा बोर्ड की विशेष अपीलों पर सुनवाई जारी
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प्रयागराज, (हि.स.)। जूनियर बेसिक स्कूलों में 30 नवम्बर 2011 को 75 हजार 885 ट्रेनी टीचरों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में से सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई 12091 श्रेणी के बचे अभ्यर्थियों को बुलाकर फिर से काउंसलिंग में भाग लेने के लिए सरकार को नया विज्ञापन जारी करने के एकल जज द्वारा पारित आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार व बेसिक शिक्षा बोर्ड की विशेष अपीलों पर सुनवाई जारी है।

सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि निर्धारित

दोनों अपीलों पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा एवं जस्टिस एस क्यू एच रिजवी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 2 दिन की बहस के बाद कोर्ट ने इन अपीलों पर फिर से सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।

2011 की भर्ती को लेकर फिर से शेष बचे अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कराने का निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता रामानंद पांडेय तथा बेसिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से कुष्मांडा शाही ने एकल जज के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की है। इन अपीलों में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 एवं बाद में इस मामले में अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल अवमानना केस में 13 दिसम्बर 2019 को सरकार द्वारा ट्रेनी टीचरों की सम्पन्न की गई भर्ती को सही मानते हुए अवमानना का केस खत्म कर दिया था। ऐसे में 2011 की भर्ती को लेकर फिर से शेष बचे अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कराने का एकल जज द्वारा निर्देश दिया जाना गैरकानूनी है।

एकल जज द्वारा पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है

वहीं दूसरी तरफ अभ्यर्थियों विनय कुमार पांडेय व अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, एचएन सिंह, आरके ओझा, अनिल तिवारी का कहना है कि एकल जज द्वारा पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। बहस की गई कि सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अवमानना वाद में सही तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिस कारण इस प्रकार का आदेश पारित हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती को सही मानते हुए अवमानना केस समाप्त कर दिया। कोर्ट द्वारा पूछे गए इस प्रश्न के जवाब में की क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई कर सकती है। इस पर अभ्यर्थियों की तरफ से वकीलों का कहना था कि इस मामले में सुनवाई करने में हाईकोर्ट को कोई विधिक बाधा नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट को सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट मंगलवार को फिर इन अपीलों पर सुनवाई करेगी

दो दिनों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की विशेष अपील बेंच ने परिषद के अधिवक्ता से काउंसलिंग में अपनाई गई चयन की प्रक्रिया व कट ऑफ मार्क को लेकर अपनाए गए नियमों को बताने को कहा है। कोर्ट मंगलवार को फिर इन अपीलों पर सुनवाई करेगी।

मालूम हो के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विनय कुमार पांडेय व कई अन्य तथा इससे सम्बद्ध अन्य याचिकाओं पर आदेश पारित कर निर्देश दिया है कि शेष बचे अभ्यर्थियों का काउंसलिंग कराने के लिए फ्रेश विज्ञापन 5 फरवरी 2024 से शुरू होने वाले सप्ताह में जारी किया जाए और यह विज्ञापन तीन अखबारों में प्रकाशित कराया जाए।

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