प्रयागराज, 27 मार्च (हि.स.)। अतुल्य गंगा परिक्रमा तीन हजार किमी सौ दिनों में तय कर प्रयागराज पहुंची। मां गंगा की दुर्दशा से व्यथित सैनिकों ने अतुल्य गंगा के मुख्य उद्देश्य के रूप में, मुंडमाल गंगा परिक्रमा की संकल्पना की। टीम लीडर गोपाल शर्मा ने बताया कि 16 दिसम्बर को प्रयागराज से प्रारम्भ हुई छह हजार किमी लम्बी और आठ महीने में पूरी होने वाली यह यात्रा, विश्व की कठिनतम और सबसे लम्बी पदयात्रा है। श्री शर्मा ने बताया कि सैनिक और उनके अन्य साथी इस दुस्साहसिक यात्रा को पूरा करने की ठान चुके हैं और पर्वतों, जंगलों और ग्लेशियर को लांघते हुए पूरी करके रहेंगे। यह यात्रा केवल एक यात्रा नहीं है, यह ऐसा प्रण है जो गंगा मैया को फिर से निर्मल और अविरल करके ही हमें सांस लेने देगा। हम यात्रा के साथ साथ कई ऐसे अभियान चला रहे हैं जिनके परिणाम दूरगामी होंगे और मां गंगा को उनका वैभव वापस दिलाएंगे। बताया कि प्रदूषण मापन से हम यात्रा के दौरान हर दस किमी पर गंगाजल की गुणवत्ता का वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहे हैं, जिसका विवरण हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। गंगा नदी में गिरने वाले हर नाले की पहचान की जा रही है और प्रदूषण के ऐसे हर स्रोत का उसके जियो-लोकेशन के साथ विस्तृत डेटा तैयार किया जा रहा है। अब तक 500 प्वाइंट पर प्रदूषण और स्त्रोत का जायजा लिया जा चुका है। पूरे परिक्रमा पथ पर पयार्वरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कर रहे हैं। 11 वर्षों तक चलने वाली इस तपस्या के अंत तक आते-आते हम माँ गंगा को वृक्षों की एक माला, वृक्षमाल पहना चुके होंगे। अब तक लगभग 25 हजार पेड़ लगाए जा चुके हैं। गंगा की दशा तभी सुधरेगी जब समाज का हर व्यक्ति उनकी चिंता करेगा। रक्षा मंत्रालय के जनसम्पर्क अधिकारी व विंग कमांडर शैलेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि टीम में कनर्ल आर.पी पांडे पुणे, हीरेनभाई पटेल अहमदाबाद, रोहित उमराओ बरेली, रोहित जाट हापुड़, शगुन त्यागी हापुड़, कमांडर विश्वनाथन केरला हैं। कहा कि नदियां जीवन का अमूल्य आधार हैं, जो हमारे जीवन और कृषि के लिए पानी और संस्कृति छाया देती हैं। अपने पूर्वजों और अपनी आने वाली पीढ़ियों का कर्ज है हम पर, जिससे हम तभी मुक्त होंगे जब हम मां गंगा को पूणर्तया प्रदूषणहीन करके फिर से उन्हें उसी अलौकिक रूप में ले आएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त




