अधिशासी अधिकारी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप प्रयागराज, 11 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर पंचायत मनियर, बलिया की अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी नगर पंचायत में कम्प्यूटर आपरेटर अखिलेश कुमार व ड्राइवर चंदन कुमार वर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपियों ने ऐसी परिस्थिति पैदा कर दी कि अकेली रह रही महिला अधिकारी के पास आत्महत्या को मजबूर होना पड़ा। कम्प्यूटर आपरेटर ने राय के फर्जी हस्ताक्षर बनाये और ड्राइवर ने सेल्फी व चैटिंग की सूचना देकर आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा। हाईकोर्ट ने कहा कि पर्याप्त सबूतों के साथ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। ये जमानत पर छोड़े जाने के हकदार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने दिया है। इसी मामले में आरोपित चेयरमैन भीम गुप्ता को पहले जमानत मिल चुकी है और अन्य आरोपी लिपिक विनोद गुप्ता की भी जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। मालूम हो कि 6 जुलाई 2020 को नगर पंचायत मनियर की ईओ रही मणि मंजरी राय का शव बलिया कोतवाली स्थित आवास विकास कालोनी में पंखे के हुक से लटकता पाया गया था। घटना के बाद भाई विजयानंद राय की कोतवाली में दी गई तहरीर में नगर पंचायत मनियर के चेयरमैन भीम गुप्ता, लिपिक विनोद सिह, कम्प्यूटर आपरेटर अखिलेश कुमार, चालक चंदन कुमार व सिकंदरपुर के ईओ संजय राव सहित ठेकेदारों को आरोपित किया गया है। कम्प्यूटर आपरेटर व चालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जबकि सिकंदरपुर ईओ के खिलाफ सबूत न मिलने पर केस से अलग कर दिया था। चेयरमैन भीम गुप्ता ने कोर्ट में समर्पण किया था। लिपिक विनोद सिंह हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लिए थे। लेकिन हाईकोर्ट की अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा दी गई अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपितों की परेशानी एक बार फिर बढ़ते हुए दिख रही है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन





