निर्बाध विद्युत आपूर्ति व ट्यूबवेल के रख-रखाव का निर्देश प्रयागराज, 24 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने विद्युत कंपनियों को सिंचाई के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने तथा सभी जिलाधिकारियों को ट्यूबवेलों की मरम्मत व देख-रेख करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि खेती की सिंचाई के लिए बिजली न देना संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है। इससे कृषि व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने कहा है कि सरकारी एजेन्सी का दायित्व है कि खेती की सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति अनवरत जारी रखे और ट्यूबवेल की मरम्मत व देखरेख करे। कोर्ट ने जिलाधिकारी बांदा को बछेहरा गांव की पिपरी ट्यूबवेल की देखरेख करने का आदेश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने नाथू प्रसाद कुशवाहा व 14 अन्य की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची का कहना था कि ट्यूबवेल का कनेक्शन अक्सर कटा रहता है। ट्यूबवेल की भी मरम्मत नहीं की जाती। मरम्मत के लिए कोई एजेन्सी ही नहीं है। जिसके कारण खेत में पानी नहीं मिल पा रहा है और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। इस पर कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी तो बताया गया कि विद्युत कनेक्शन जोड़ दिया गया है। इस पर याची ने कहा कि अक्सर कनेक्शन कट जाता है और मरम्मत नहीं की जाती। इस पर कोर्ट से प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं और कहा है कि सिंचाई के लिए विद्युत आपूर्ति निर्बाध रूप से चालू रखी जाय। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन




