नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत प्रशासनिक खामियों और रेस्क्यू सिस्टम की कमियों को उजागर कर गई। 16-17 जनवरी की रात घने कोहरे में युवराज की कार सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। आरोप है कि मौके पर प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौजूद रहने के बावजूद समय रहते मदद नहीं की गई। हादसे के बाद यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को निलंबित किया। हालांकि, आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस कदम को महज औपचारिक कार्रवाई बताया।
”सिस्टम की गंभीर खामियां सामने आई”
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आईएएस अधिकारियों का नियमित ट्रांसफर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं माना जा सकता। सौरभ भारद्वाज ने नोएडा डीएम मेधा रूपम पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की और आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। सौरभ भारद्वाज ने कहा “नोएडा की DM मेधा रूपम ही SDRF और रेस्क्यू ऑपरेशन की असली जिम्मेदार हैं, लेकिन उन्हें बचाया जा रहा है।” उन्होंने यह भी लिखा कि DM मेधा रूपम, CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं, जिससे भ्रष्ट IAS अधिकारियों पर कार्रवाई करना और दोषी ठहराना बेहद मुश्किल हो जाता है और सिस्टम की गंभीर खामियां सामने आती हैं।
नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटाया, तीन सदस्यीय SIT करेगी जांच
युवराज मेहता के साथ हुई दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। 19 जनवरी को नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा कर वेटलिस्ट पर डाल दिया गया और उन्हें नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी पद से भी हटाया गया। सरकार ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो पांच दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस कार्रवाई के अलावा एक जूनियर इंजीनियर को भी बर्खास्त किया गया है और ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं।
कैसे हुआ हादसा ?
दरअसल, 16-17 जनवरी की रात युवराज मेहता अपने गुरुग्राम स्थित कार्यालय से नोएडा के सेक्टर-150 लौट रहे थे, तभी घने कोहरे और कम दृश्यता के चलते उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा अनियंत्रित हो गई। कार एक टूटी बाउंड्री वॉल से टकराते हुए गहरे, पानी से भरे खुदाई वाले गड्ढे में गिर गई। युवराज ने किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़कर करीब 1.5-2 घंटे तक फंसे रहे। इस दौरान उन्होंने अपने पिता को कॉल कर मदद मांगी और मोबाइल की टॉर्च से संकेत दिए, लेकिन पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद होने के बावजूद समय पर उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत दम घुटने और हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुई। इस दुखद घटना ने न केवल नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी दिखाया कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजाम और रेस्क्यू सिस्टम में गंभीर खामियां हैं।





