नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के मथुरा में बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका मुस्लिम ठेकेदार सलीम अहमद (कनिका कंस्ट्रक्शन) को दिए जाने के विरोध में स्थानीय साधु-संत और लोग खड़े हो गए हैं। फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने और मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, इस विवाद के कारण अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है और स्थानीय अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंदिर के सन्यासी और बृजवासी इस ठेके के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
स्टील रेलिंग ठेका विवाद
बांके बिहारी मंदिर के कॉरिडोर और परिसर में स्टील रेलिंग का काम चल रहा है, जिसे ठेकेदार सलीम अहमद कर रहे हैं। स्थानीय संत समाज ने इसके विरोध में आपत्ति जताई है। फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कहा कि यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। उनका कहना है कि मंदिर प्रांगण में ऐसे ठेकेदारों को काम करने की अनुमति देना, जिन्हें सनातन धर्म के खिलाफ माना जाता है, ब्रजवासियों और मंदिर श्रद्धालुओं के लिए अस्वीकार्य है।
फलाहारी महाराज ने पत्र में लिखा कि “जहां भगवान राधा-कृष्ण ने महारास और माखन चोरी की लीला की, जहां बांके बिहारी विराजमान हैं, वहां गौमांस खाने वाले और सनातन धर्म के विरोधी आएंगे तो यह ब्रजवासियों को कभी स्वीकार नहीं होगा। उनके प्रवेश से हमारे कृष्ण कन्हैया भी रूठ जाएंगे।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सनातनी ठेकेदार उपलब्ध हैं, तो मुगलों के वंशज को ठेका क्यों दिया गया, जो मथुरा, काशी और अयोध्या के मंदिर तोड़कर नमाज पढ़ते हैं। महाराज ने स्पष्ट किया कि ऐसे ठेकेदारों को मंदिर से एक किलोमीटर के दायरे तक प्रवेश नहीं दिया जाएगा और मामले की जांच की मांग भी की है।
ठेका रद्द करने और जांच की मांग
स्थानीय संतों और जनता ने ठेका रद्द करने और मामले की जांच की मांग की है। आरोप है कि ठेकेदार ने अपनी पहचान छिपाकर ठेका हासिल किया। स्थानीय निवासी, पुजारी और मंदिर के भक्त भी इस फैसले के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले में न तो किसी अधिकारी ने और न ही ठेकेदार ने कोई प्रतिक्रिया सामने आयी है। विवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है और यह मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।





