नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कानपुर में लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में नया मोड़ आया है। हादसे के बाद आरोपी शिवम मिश्रा और उनके परिवार ने दावा किया था कि दुर्घटना के समय कार उनके ड्राइवर मोहन चला रहे थे। मोहन ने हलफनामा देकर कहा कि वह घटना के समय गाड़ी चला रहे थे और अब सरेंडर करना चाहते हैं। हालांकि, पुलिस ने मोहन को वांछित नहीं मानते हुए उनका सरेंडर स्वीकार नहीं किया और कोर्ट ने भी फिलहाल उसे राहत नहीं दी। कोर्ट ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिससे इस मामले की पड़ताल और गहराई से की जा सके।
ड्राइवर मोहन और पुलिस की राय में विरोधाभास
डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि जांच में सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहे थे। पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर मोहन की दलील को खारिज किया। ग्वालटोली पुलिस का कहना है कि विवेचना में ड्राइवर मोहन का नाम नहीं आया, इसलिए उनका सरेंडर नहीं लिया गया। वहीं, कोर्ट ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कार्रवाई पर ध्यान देने का निर्देश दिया है।
शिवम मिश्रा की अर्जी और दलील
शिवम मिश्रा ने एसीजेएम कोर्ट में अर्जी दी कि कार उनके स्वामित्व में है और सभी दस्तावेज वैध हैं। उन्होंने कहा कि उनके वाहन से कोई हादसा नहीं हुआ और कार का दरवाजा जनता द्वारा तोड़ा गया। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिभूति और मुचलके के जरिए कार को रिलीज करने की पेशकश भी की।
हादसा और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस केस का मामला बड़े कारोबारी से जुड़ा होने के कारण शुरू से ही चर्चा में रहा। एक्सीडेंट के बाद वीडियो फुटेज आने के बावजूद पुलिस ने शुरुआती रिपोर्ट अज्ञात में दर्ज की, जिससे आरोपों और आलोचना का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की।
मुख्यमंत्री का निर्देश: सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए पुलिस आयुक्त को सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब शिवम मिश्रा को नोटिस भेजकर तलब करने और विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच करने की तैयारी कर रही है।





