नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हर साल दिवाली के मौके पर पटाखों को लेकर दी जाने वाली चेतावनियां और जागरूकता के प्रयास निरर्थक साबित होते हैं। पटाखा जलाने से होने वाले प्रदूषण और AQI जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज करते हैं, पर सबसे जरूरी है अपने और दूसरों के प्रति सावधानी बरतना। बुधवार रात की लापरवाही ने 19 परिवारों की खुशियों को बुझा दिया। उजाले का त्योहार एक पल में गम और सन्नाटे में बदल गया।
दरअसल, गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र, शक्ति खंड-2 में हुई घटना बहुत बड़ी चेतावनी है। हालांकि हादसे में कोई जान नहीं गई, पर क्या हम सच में इससे बच गए हैं? प्लॉट नंबर 188 के पांच मंजिला दिव्या अपार्टमेंट में अचानक लगी आग ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। फायर विभाग और स्थानीय लोगों की तत्परता से 19 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सालों से संजोई गई गृहस्थी जलकर राख
इस हादसे में सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आग ने इन 19 परिवारों की जिंदगी के सारे सपने भस्म कर दिए। सुई से लेकर सोफे तक, हर चीज जो वर्षों की मेहनत से जमा की गई थी, अब बस याद बनकर रह गई है। वीडियो और तस्वीरों में बिल्डिंग की तबाही साफ दिखती है, जो आग की भीषणता को बयां करती है। इन परिवारों के सिर से छत छिन गई है, यह हादसा टला नहीं, बल्कि इनपर एक बड़ा कहर टूटा है।
6 फायर टेंडर से आग पर काबू पाया
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि रात करीब 8:30 बजे आग लगने की सूचना मिली। फौरन फायर स्टेशन वैशाली से तीन टेंडर मौके पर रवाना किए गए, साथ ही काला पत्थर, इंदिरापुरम और अटल चौक वसुंधरा से भी दमकल गाड़ियां मंगवाई गईं। साहिबाबाद से भी एक अतिरिक्त टेंडर भेजा गया। लगभग छह फायर टेंडर और 5-6 होज पाइप की मदद से दमकलकर्मियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया।
फायर फाइटर्स ने ब्रीदिंग अपरेटस पहनकर धुएं से घिरी इमारत के अंदर जाकर आग बुझाई। शुरुआती जांच में पता चला कि दीपावली पर जलाई गई आतिशबाजी की एक चिंगारी बालकनी में रखे सामान और फाइबर शीट्स में आग लग गई। लपटें तेजी से फैलते हुए कई फ्लैट की बालकनियों तक पहुंच गईं।
आग की शुरुआत कहां से हुई ?
स्थानीय निवासी दीपक त्यागी ने आग लगने की शुरुआत अपने फ्लैट से होने की बात कही है। उनका कहना है कि उनके इन्वर्टर के पास एक पटाखा गिरने से आग भड़की। वहीं, बिल्डिंग के नीचे जितेंद्र और राजीव नाम के दो पड़ोसी पटाखे फोड़ रहे थे। RWA अध्यक्ष अशोक त्यागी ने इन दोनों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे झगड़ा करने लगे। दीपक ने बताया, “मैंने खुद अग्निशामक यंत्र से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेज थी कि मैं कुछ नहीं कर पाया। ये आग पल भर में पूरे फ्लैट से बाहर निकलकर पूरी बिल्डिंग में फैल गई।” इस विवाद और लापरवाही ने ना केवल कई परिवारों की छत उड़ा दी, बल्कि दीपावली के उल्लास को भी मातम में बदल दिया।
दूसरे निवासी ने लगाए आरोपों को ठुकराया
एक अन्य निवासी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “मैं तीसरी मंजिल पर रहती हूं। पूजा के बाद हम बच्चे-बच्चों के साथ खाना खा रहे थे। कोई भी यह नहीं कह सकता कि हमने आग लगाई। मेरे पति का नाम राजीव है और हम खुद इस बिल्डिंग के ही निवासी हैं। हमारा क्या फायदा इसे जलाने में? कुछ लोगों ने बेवजह गलत बातें फैलाई हैं।”
वहीं, दमकल विभाग ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है ताकि आग लगने की सच्चाई का पता लगाया जा सके। अधिकारी बताते हैं कि यदि समय पर सूचना नहीं मिलती, तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था। बिल्डिंग की बालकनियों में रखा फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया है, जबकि इमारत के कुछ हिस्सों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।
आग से बचाव: जानिए खतरे और अपनाएं ये सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, रिहायशी इमारतों में आग लगने के सबसे बड़े खतरे बालकनी, इन्वर्टर, वायरिंग, रसोई और आतिशबाजी जैसी बाहरी वजहों से होते हैं। थोड़ी सी लापरवाही पूरे फ्लोर या बिल्डिंग को राख कर सकती है।
आग लगने के मुख्य कारण
– बालकनी में लकड़ी, फाइबर शीट, पुराने फर्नीचर या अन्य ज्वलनशील सामान रखना
– इन्वर्टर या बैटरियों को खुले में रखना, खासकर त्योहारों या आतिशबाजी के समय
– पुरानी और टूटी-फूटी बिजली की वायरिंग, ओवरलोडेड सर्किट
– एक ही पावर बोर्ड से कई भारी इलेक्ट्रिक उपकरण चलाना
– त्योहारों या शादी-ब्याह में पटाखे जलाते वक्त आस-पड़ोस की सुरक्षा का ध्यान न रखना
इन सावधानियों का रखें ध्यान
– बालकनी, गलियारे या खिड़कियों के पास कोई भी ज्वलनशील वस्तु जैसे फर्नीचर, कपड़े, कागज, डिब्बे आदि न रखें
– आतिशबाजी हमेशा खुली जगह पर, और इमारतों से दूर करें
– हर घर में फायर एक्सटिंग्विशर रखें और परिवार के सभी सदस्य इसका सही उपयोग सीखें
– समय-समय पर घर की वायरिंग जांचवाएं और ओवरलोडिंग से बचें
– बिल्डिंग में फायर अलार्म, इमरजेंसी एक्जिट और अग्नि सुरक्षा के अन्य इंतजामों को नियमित रूप से जांचें
सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। छोटी-छोटी लापरवाही कभी-कभी बड़ा हादसा बन सकती है, इसलिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है।





