नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 85 वर्ष की उम्र में 12 फरवरी को निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली। आचार्य सत्येंद्र दास ने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया था। वह पिछले 33 वर्षों से राम मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में कार्यरत थे।
1992 में हुए थे नियुक्त
आचार्य सत्येंद्र दास को 1992 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान श्री राम जन्मभूमि मंदिर का मुख्य पुजारी बनाया गया था। तब से उन्होंने लगातार भगवान रामलला की सेवा की और राम मंदिर आंदोलन से लेकर भव्य राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तक हर ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
कितना वेतन मिलता था?
बतौर मुख्य पुजारी, आचार्य सत्येंद्र दास को राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से वेतन दिया जाता था। शुरुआत में उन्हें 100 रुपये प्रति माह मिलते थे, लेकिन समय के साथ यह राशि बढ़ती गई। मई 2023 में उनका वेतन 15,520 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया। इसके बाद सितंबर 2023 में फिर से वृद्धि हुई और उनकी सैलरी 38,000 रुपये प्रतिमाह हो गई। मुख्य पुजारी के साथ-साथ अन्य पुजारियों और सहायकों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई। राम मंदिर के सहायक पुजारी का वेतन 20,000 रुपये से बढ़ाकर 33,000 रुपये किया गया, जबकि सहायकों का वेतन 24,440 रुपये कर दिया गया। आचार्य सत्येंद्र दास ने स्वयं कहा था कि जब तक ट्रस्ट नहीं बना था, तब तक उन्हें बहुत कम सुविधाएं मिलती थीं, लेकिन ट्रस्ट बनने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
राम मंदिर निर्माण के साक्षी
आचार्य सत्येंद्र दास ने राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक की पूरी यात्रा को करीब से देखा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी भगवान रामलला की सेवा जारी रखी और मंदिर आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बने। उनकी सेवा और समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।





