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गंगा नदी में शैवाल पाये जाने और पानी का रंग हरा दिखने पर पर्यावरणविद चिंतित

वाराणसी, 06 जून (हि.स.)। गंगा नदी में शैवाल पाये जाने और पानी का रंग हरा दिखने पर पर्यावरणविद चिंतित है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा में शैवाल का पाया जाना जल एवं इसका उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। रविवार को तुलसी घाट पर संकट मोचन फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित वेबिनार में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर जितेंद्र पांडेय ने कहा कि सभी प्रकार के जीवों के ऊर्जा का श्रोत मां गंगा है। ठोस, द्रव एवं गैस तीनों ही अवस्था में पाए जाने वाला गंगाजल विष्णु तत्व है। गंगा से ही मानव संस्कृति एवं सभ्यता की उत्पत्ति हुई। उन्होंने वैदिक श्लोकों के माध्यम से गंगा जल एवं जलवायु के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गंगा के लचीलेपन को समाप्त कर दिया गया तो इकोसिस्टम को संभालना मुश्किल हो जाएगा। वेबिनार में संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं श्री संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो.विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि गंगा का वाणिज्यिक लाभ उठाने के उद्देश्य से इसमें छेड़छाड़ किया जा रहा है। इससे निकट भविष्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि गंगा तट के ललिता घाट पर गंगा के अंदर एक लंबे प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है। जिसके कारण गंगा का प्रवाह बाधित हो रहा है। अब इसके दुष्परिणाम भी दिख रहे है। ललिता घाट के अपस्ट्रीम में शैवाल के पनपने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है। प्रो. मिश्र ने कहा कि इस प्लेटफार्म की वजह से घाटों की तरफ सिल्ट का जमाव बढ़ेगा एवं गंगा घाट से क्रमशः दूर हो जायेगी। गंगा के पूर्वी तट पर एक नहर का निर्माण भी किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस कारण से गंगा के पश्चिमी तट पर पढ़ने वाले जल दबाव में कमी आएगी। घाटों के नीचे हो रहे जल रिसाव में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि नहर का मुख्य उद्देश्य मालवाहक जल पोतों के आवागमन को सुचारू रूप प्रदान करना है। प्रो.मिश्र ने कहा कि काशी में गंगा का अर्ध चंद्राकार प्राकृतिक स्वरूप जो सदियों से बना हुआ है। काशी में गंगा के महत्ता को दर्शाता है। आज उसे बचाने के नाम पर नष्ट करने का कार्य हो रहा है। आज जो भी हो रहा है वह प्रौद्योगिकी के विरुद्ध है। इसके दुष्परिणाम अवश्य सामने आएंगे। काशी कथा के डा.अवधेश दीक्षित ने बताया कि मनमाने ढंग से योजनाएं लागू की जा रही हैं। वेबिनार का संचालन प्रोफ़ेसर एस.एन.उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन राजेश मिश्र ने किया। इसमें रामयश मिश्र,अशोक पांडेय,नरेंद्र त्रिपाठी ने भी भाग लिया। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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