– मंगला आरती के बाद सुबह छह बजे से शुरू हुआ दर्शन पूजन – कोविड संक्रमण के कारण श्रद्धालुओं की संख्या रही काफी कम मीरजापुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। चैत्र नवरात्र मेले के पांचवें दिन शनिवार को विंध्यवासिनी के दरबार में दर्शन पूजन करने वालों की संख्या काफी कम रही। मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट बंद कर दिया गया। सुबह छह बजे आम श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन के लिए मंदिर का कपाट खोला गया तो कुछ सौ की संख्या में भक्त मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में पहुंच कर दर्शन पूजन कर पुण्य की कामना की। अष्टभुजा और काली खोह मंदिरों पर भी भक्तों की भारी कमी रही। नवरात्र के पंचमी तिथि को आदि शक्ति की अधिष्ठात्री मां विंध्यवासिनी के स्कंद स्वरूप का दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि का अशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूर्व के नवरात्र मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट थे। इसके बाद नवमी तिथि तक विंध्यधाम में भक्तों की बराबर भीड़ जमा रहती थी। तीर्थ पुरोहितों के आवास और विंध्यधाम के होटलों व अतिथिगृहों में श्रद्धालुओं को रात गुजारने के लिए कमरा नहीं मिल पाता था। इस बार होटल और अतिथिगृह खाली पड़े है। गैर प्रांत और जिलों के श्रद्धालु ही नहीं आ रहे है। कोरोना संक्रमण के कारण पुरोहितों ने भी श्रद्धालुओं को घर पर ही मां विंध्यवासिनी का आराधना करने की सलाह देकर विंध्याचल आने से रोक दिए। नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं के न आने से माला-फूल, चुनरी और प्रसाद बेंच कर आजीविका चलाने वाले दुकानदारों के समक्ष रोजीरोटी की समस्या खड़ी हो गयी है। होटलों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को भी छुट्टी दे दी गयी है। विंध्यधाम की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसी स्थिति सामान्य दिनों मेें भी नहीं रहती है, जैसी कोविड संक्रमण के कारण हो गयी है। तीर्थ पुरोहित भी संक्रमण को लेकर सहमे हुए है। हिन्दुस्थान समाचार/ गिरजा शंकर




