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Saturday, March 14, 2026
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अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में यूपी सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- आरोपियों पर कार्यवाई जारी रहेगी

नोएडा की सूरजपुर अदालत ने अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में यूपी सरकार की केस वापसी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क।नोएडा की सूरजपुर अदालत ने अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में यूपी सरकार की केस वापसी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। उत्तर प्रदेश सरकार को अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में बड़ा झटका लगा है। नोएडा स्थित सूरजपुर की अदालत ने हत्यारोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। इससे स्पष्ट हो गया कि बिसाहड़ा गांव में 2015 में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना में आरोपी कानूनी रूप से बच नहीं पाएंगे और उनके खिलाफ केस जारी रहेगा। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा केस वापस लेने के लिए दाखिल की गई अर्जी को महत्वहीन और आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।

मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा

यूपी सरकार के केस वापस लेने के फैसले के खिलाफ मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मृतक मोहम्मद अखलाक की पत्नी इकरामन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने सरकार द्वारा ट्रायल कोर्ट में केस वापसी के आवेदन को चुनौती दी। याचिका अधिवक्ता उमर जामिन के माध्यम से दाखिल की गई, जिसमें 26 अगस्त 2025 के सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा, ADM, संयुक्त निदेशक अभियोजन और DGC के आदेशों को भी याचिका में चुनौती दी गई है।

अखलाक लिंचिंग की भयावह घटना

28 सितंबर 2015 को यूपी के दादरी जिले के बिसाहड़ा गांव में भीड़ ने मोहम्मद अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मॉब लिंचिंग के आरोप में कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 14 जमानत पर हैं। घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इस पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस भी हुई थी। अब अदालत ने साफ कर दिया है कि अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दबाव या प्रशासनिक आदेश से केस को वापस नहीं लिया जाएगा।

याचिका में क्या मांग रखी गई

इकरामन ने याचिका में राज्य सरकार और आरोपी सहित कुल 21 लोगों को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में सरकार द्वारा केस वापसी की सिफारिश को गैरकानूनी बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए डबल बेंच नियुक्त की है, जो शीतकालीन अवकाश के बाद केस की समीक्षा करेगी।

अदालत का संदेश और कानूनी प्रक्रिया

सूरजपुर कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि कानून के तहत किसी भी व्यक्ति की जान लेने वाले अपराधियों को छूट नहीं दी जाएगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मॉब लिंचिंग जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक दबाव या राजनीतिक निर्णय कानून की परिपाटी पर हावी नहीं हो सकते। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि अपराधियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

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