प्रयागराज, 25 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीवर आदि की खोदाई का काम मैन्युअल करने वाले सफाईकर्मियों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रयागराज से जवाब तलब किया है। जनहित याचिका विभिन्न लॉ कॉलेजों में पढ़ने वाले विधि छात्र-छात्राओं अनुप्रिया यादव व सात अन्य ने दाखिल की है। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव प्रथम की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि विधि छात्रों की टीम ने प्रयागराज और कुछ अन्य जिलों में मैन्युअल काम करने वाले सफाईकर्मियों के जीवन का अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार की है। अध्ययन में पाया गया कि सफाईकर्मियों को खतरनाक मैन्युअल काम लेने से रोकने और उनके पुनर्वास के लिए 2013 में बनाए गए एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। मैन्युअल काम करने वाले सफाईकर्मियों को सुरक्षा और तकनीकी उपकरण सक्शन मशीन आदि नहीं मुहैया कराए जा रहे हैं और उनसे अमानवीय तरीके से काम लिया जा रहा है। छात्रों की टीम ने सुझाव दिया है कि सफाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। स्थानीय निकायों और सेनिटरी इंस्पेक्टर आदि को 2013 के एक्ट के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाए, उपकरणों की साफ सफाई और तकनीकी जानकारी का प्रशिक्षण दिया जाए, एक्ट के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निगरानी करने वाले प्राधिकारी दंडात्मक कार्रवाई करें। छात्रों का कहना है कि सफाईकर्मियों के परिवारों का पुनर्वास किया जाए। उनके बच्चों को स्कॉलरशिप दी जाए और परिवार के एक सदस्य को तकनीकी प्रशिक्षण देकर नौकरी दी जाए। रिपोर्ट में कई अन्य बिंदुओं पर भी सुझाव दिए गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को इस पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन
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