back to top
32.1 C
New Delhi
Wednesday, March 11, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

चैत्र नवरात्र : छठवें दिन माता कात्यायनी देवी की पूजा करने से होता है पापों का नाश

कानपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना संक्रमण के चलते जहां एक दिवसीय लॉक डाउन की व्यवस्था लागू की है। जिसके चलते सभी सिद्धपीठ मंदिर व धार्मिक स्थलों पर भी दर्शन के लिए रोक लगा दी गई है। भक्तों ने चैत्र नवरात्र के छठवें दिन माता कात्यायनी देवी की पूजा घरों में रहकर ही संपन्न की और माता से कोरोना रूपी दैत्य से सम्पूर्ण संसार को निजात दिलाने के लिए प्रार्थना की। तपेश्वरी मंदिर के पुजारी नरेश ने बताया कि नवरात्र में माता सभी भक्तों के घरों में निवास करते हुए उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्र में माता की मूर्ति व कलश स्थापना कर सच्चे मन से मां की आराधना करने से माता खुश होती है और अपने भक्तों के कष्टों को भी हर लेती है। उन्होंने बताया कि माता ‘कात्यायनी’ अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं।शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख है। स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं। जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है। जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतंजलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। उनका वर्णन देवीभागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है। जिसे चार सौ से पांच सौ ईसा में लिपिबद्ध किया गया था। बौद्ध और जैन ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों, विशेष रूप से कालिका पुराण (दस वीं शताब्दी) में उनका उल्लेख है, जिसमें उद्यान या उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है। उनका कहना है कि परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के छठवें दिन उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माता कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माता के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं। नवरात्रि का छठवें दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माता जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए। इसके अलावा जिन कन्याओं के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो। उन्हे इस दिन माता कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है। हिन्दुस्थान समाचार/हिमांशु

Advertisementspot_img

Also Read:

Navratri 9th Day: आज नवमी के दिन करें मां सिद्धिदात्री के इन मंत्रों का जाप, घर परिवार में होगी माता की कृपा

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्र का 9 दिन बाद ही खास माना जाता है 9 दिनों तक माता की पूजा अर्चना की जाती है।...
spot_img

Latest Stories

भारत में क्या है इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया? विदेशों से कितनी अलग है पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बुधवार 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट...

बॉक्स ऑफिस पर The Kerala Story 2 का रहा अच्छा प्रदर्शन, जानिए कलेक्शन रिपोर्ट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। 'द केरल स्टोरी 2: गोज...

कीर्ति आजाद के बेतुके बयान पर भड़के भारतीय क्रिकेट के बड़े दिग्गज, हरभजन ने भी जमकर लताड़ लगाई

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। न्यूजीलैंड को परास्त करके टी20 विश्व...

Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मध्य पूर्व में जारी तनाव...

हरीश राणा को SC ने इच्छा मृत्यु की इजाजत दी, देश में पहली बार हुआ ऐसा फैसला

नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को...

आज OTT पर लगेगा क्राइम पॉलीटिकल फिल्मों का ड्रामा, जानिए रिलीज होगी कौन सी फिल्म और सीरीज?

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हर महीने...