कानपुर, 07 जून (हि.स.)। जनपद में हिस्ट्रीशीटर को भगाने के मामले में गिरफ्तार पूर्व भाजपा नेता सहित चार लोगों की जमानत को लेकर मचे बवाल पर आज उस वक्त विराम लग गया जब सोमवार को सभी की निचली अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस दौरान कचहरी में अधिवक्ताओं की भीड़ एकतरफा कार्रवाई करने के चलते बवाल की आशंका बनी हुई थी। इसको लेकर भारी पुलिस बल के साथ पीएसी व क्यूआरटी के जवान तैनात रहें। दरअसल, बीते दिनों बर्रा के हिस्ट्रीशीटर व 25 हजार के इनामी मनोज सिंह को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की घटना में भाजपा के पूर्व नेता नारायण सिंह भदौरिया, गोपाल शरण चौहान और रॉकी यादव व एक अन्य की एसीएमएम तृतीय की अदालत में पेशी होनी थी। मामले में कोर्ट में आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी थी। मामले में अधिवक्ताओं के आरोपियों के पक्ष में आने से प्रकरण काफी पेंचीदा हो गया था और कचहरी में आज पेशी के दौरान बवाल की आशंका थी। इसको लेकर अधिवक्ताओं की भीड़ जमा थी। बवाल होने की संभावना को भांपते हुए पुलिस ने प्रकरण में फूंक-फूंक कर कदम रखा और भारी पुलिस के साथ कचहरी व पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर पीएसएी, क्यूआरटी के जवानों को तैनात कर दिया गया। इस बीच पुलिस ने बिना आरोपियों को कोर्ट लाए मामले में सुनवाई की गई। जिस पर कोर्ट ने जमानत अर्जी का खारिज कर दिया। बताते चले कि, आरोपियों में गोपाल शरण चौहान अधिवक्ता है और घटना के दौरान वह मौके पर खड़े थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें में हिस्ट्रीशीटर को छुड़ाने की घटना में नामजद कर दिया और गिरफ्तारी कर कार्रवाई शुरू कर दी। इसको लेकर अधिवक्ताओं में गुस्सा है। इसके चलते ही अधिवक्ताओं ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग पुलिस आयुक्त से की थी। अब मामले कोर्ट के जमानत अर्जी खारिज होने से बाद प्रकरण में आने वाले दिनों में पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच तनातनी देखने को मिल सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/महमूद




