अयोध्या, 03 अप्रैल (हि.स.)। प्रत्येक वर्ष होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा स्थगित कर दी गई है। विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल के तत्वाधान में चौरासी कोस की परिक्रमा हर वर्ष निकाली जाती थी। अयोध्या के माध्यम से चैत्र पूर्णिमा को परिक्रमा प्रारंभ की जाति थी और सीता नवमी तक अनवरत चलती थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार अयोध्या के शास्त्रीय सीमा की परिक्रमा होती है। विहिप ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर चौरासी कोस की परिक्रमा स्थगित की गई। पिछले वर्ष भी परिक्रमा को स्थगित किया गया था। 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के मौके पर 84 कोस की परिक्रमा प्रारंभ होना था। परिक्रमा के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने शनिवार को बताया कि श्रीराम नवमी के तत्काल बाद हनुमान मंडल अयोध्या के तत्वाधान में संचालन में कारसेवकपुरम से प्रस्थान कर मखभूमि मखौड़ा से प्रारंभ होकर अवध धाम के चौरासी कोस में चलती है। जो चैत्रपूर्णिमा से प्रारंभ होकर सीता नवमी तक अनवरत चलती आ रही है। इस दौरान श्रृंगीऋषि आश्रम, गोसाईगंज, तारून, आस्तीकन, जनमेजयकुंड, अमानीगंज, रूदौली, पटरंगा,पसका, वराही देवी, सूकर क्षेत्र आदि सीमावर्ती जिलों से होकर अयोध्या सरयू तट पर पहुंचती है। उन्होंने बताया इस बार भी कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखकर परिक्रमा स्थगित कर दिया गया है। जो इस बार 27 अप्रैल चैत्रपूर्णिमा को प्रारंभ होनी थी। विहिप मीडिया मीडिया प्रभारी शरद के अनुसार परंपरागत रूप से प्रत्येक वर्ष विश्व हिन्दू परिषद हनुमान मंडल के बैनर तले निकलने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा में समलित होने वाले संत धर्माचार्यों की चिंता स्थानीय समाज के सहयोग से करती आ रही है। उन्होंने कहा देश के अनेक प्रांतों के संत धर्माचार्य अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा में समलित होने की प्रतीक्षा वर्ष भर करते हैं। यह परिक्रमा हमारी सामाजिक समन्वय धार्मिक सांस्कृतिक परंपरा की अनमोल धरोहर है। हिन्दुस्थान समाचार/पवन





