– बच्चे को दो हफ्ते से लगातार आये खांसी तो ना करें नजर-अंदाज – 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में नहीं बनता है बलगम औरैया, 26 फरवरी (हि.स.)। बच्चों में टीबी के लक्षण जान पाना और उसका इलाज कर पाना एक खास तरह का चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि बच्चों में व्यस्कों की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। बच्चों का अपनी उम्र के हिसाब से कम बढ़ना या वजन में कमी होना टीबी के लक्षण हो सकते है। अगर बच्चों की भूख, वजन में कमी, दो सप्ताह से अधिक खाँसी, बुखार और रात के समय पसीना आने जैसी समस्या हो रही है। तो इन्हे अनदेखा न करे ये टीबी की निशानी हो सकती है। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके राय का। जिला क्षय रोग अधिकारी बताते है कि टीबी एक संक्रामक रोग है जो फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से फैलता है। वह बताते हैं कि कुपोषित बच्चे भी जल्दी टीबी का शिकार हो जाते हैं। स्वस्थ्य बच्चे जब टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो वह भी बीमार हो जाते हैं। यदि बच्चे को दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार खांसी आती है तो जांच कराना आवश्यक है। वह बताते है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों में बलगम नहीं बनता है। इस कारण बच्चों में टीबी का पता लगाना मुश्किल होता है। बच्चे की हिस्ट्री और कांटैक्ट ट्रेसिंग के अनुसार ही उसका पेट से सैंपल (गैस्ट्रिक लवाज) जांच के आधार पर ही टीबी का पता लगाया जाता है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी चौधरी बताते हैं कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता है टीबी कहीं पर भी हो सकती है। बच्चों में टीबी के 60 फीसदी मामले फेफड़ों से जुड़े होते हैं जबकि बाकी 40 फीसदी फेफड़ों के अतिरिक्त अन्य अंगों में होते हैं। टीबी के मामलों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। इन बच्चों में रहती है टीबी की सर्वाधिक संभावना डॉ. चौधरी बताते हैं कि ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि टीबी नाखुन और बाल छोड़कर कहीं भी हो सकती है। जो बच्चे कुपोषण, कैंसर, डायबिटीज़, एच.आई.वी. या अन्य प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाले रोगों से ग्रसित होते है उनमें टीबी से संक्रमित होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इसके अलावा जिन बच्चों की माताएँ गर्भावस्था के दौरान टीबी से ग्रसित थी, जिसने किसी टीबी ग्रसित व्यक्ति के साथ समय बिताया हो आदि। बच्चों का टीबी से बचाव • अपने बच्चे को गंभीर खांसी से पीड़ित लोगों से दूर रखें। • अपने शिशु को जरूरी टीके समय पर लगवाएं, जिसमें टीबी वैक्सीनेशन के लिए बीसीजी (बीसीजी) टीका शामिल होता है। • टीबी के लक्षण दिखने पर तुंरत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं। • एंटी टीबी दवाइयों का कोर्स बच्चे को जरूर पूरा करवाएं। हिन्दुस्थान समाचार / सुनील




