नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम कटवाने के लिए आवेदन करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
PDA और अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाने का दावा
1 और 2 फरवरी को जारी अपने बयानों में अखिलेश यादव ने कहा कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखतों के साथ फॉर्म-7 जमा किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ बड़ा धोखा बताया।
न्यायिक संज्ञान और सतर्कता की अपील
अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने वोटरों से अपील की कि वे अपनी मतदाता सूची में नाम की जांच करें। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने को कहा।
लोकसभा में भी उठा मामला, हंगामा
इस मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को अखिलेश यादव का समर्थन मिला, जिसके बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ का मामला बताया।
यूपी SIR के आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 के 57,173 आवेदन जमा किए गए। शुरुआती दिनों में आवेदन नगण्य रहे, लेकिन 11 जनवरी से इसमें तेज़ बढ़ोतरी शुरू हुई। महीने के आख़िरी दिनों में संख्या अचानक बढ़ी और 31 जनवरी को एक ही दिन में 8,503 आवेदन दाखिल हुए, जो सबसे ज़्यादा रहे।
दिन-प्रतिदिन बढ़ते आवेदन
17 जनवरी के बाद रोज़ाना हजारों की संख्या में आवेदन आए। 27 जनवरी से 31 जनवरी के बीच आवेदन संख्या में तेज़ उछाल देखा गया, जिसने पूरे SIR प्रोसेस पर सवाल खड़े कर दिए।
क्या है फॉर्म-7?
फॉर्म-7 चुनाव आयोग द्वारा जारी वह आवेदन है, जिसके जरिए किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब मतदाता की मृत्यु हो गई हो, वह स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया हो, नाम दो बार दर्ज हो या वह मतदाता





