उदयपुर, 26 जून (हि.स.)। देश में घोषित आपातकाल को लगे 46 वर्ष हो गए हैं लेकिन आज अघोषित आपातकाल देश की जनता के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। उदयपुर में शनिवार को माकपा शहर सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने बयान जारी करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक को उस आपातकाल को गलत बताते हुए माफी मांगनी पड़ रही है। सिंघवी ने कहा कि 45 वर्ष पहले भी इंदिरा गांधी ने सत्ता का केंद्रीकरण कर दिया था, लेकिन आज देश में सत्ता का ज्यादा केंद्रीकरण कर मोदी ने उसकी चाबी अंबानी-अडानी को सौंप दी है। सिंघवी ने कहा कि सत्ता के केंद्रीकरण से ही आपातकाल का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ नारे ने ही देश में आपातकाल की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि मोदी ने इतना सत्ता का केंद्रीकरण कर दिया है कि संबंधित विभाग के मंत्री को भी उनके विभाग के बारे में लिए निर्णय तक का पता नहीं होता क्योंकि सारे काम मोदी करते हैं। सिंघवी ने कहा कि आज अघोषित आपातकाल में सभी संस्थाओं की स्वतंत्रता अधिक खत्म हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राजद्रोह कानून का उपयोग उसी तरह कर रही है जिस तरह का उपयोग आपातकाल में किया गया था। सिंघवी ने कहा कि आपातकाल में मीसा में जेल जाने वालों के पेंशन की मांग करना ‘आपातकाल विरोधी आंदोलन’ के सम्मान के लिए उचित नहीं है, क्योंकि लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाले किसी आर्थिक लाभ के लिए उसमें शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि उनके पिता कॉमरेड बीएल सिंघवी आपातकाल में जेल में रहे, लेकिन उन्होंने या उनके परिवार ने कभी भी पेंशन स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि आज देश की जनता को इस अघोषित आपातकाल के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत है तो सफलता निश्चित मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल/ ईश्वर




