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भौतिक सत्यापन में खुल गई गोशालाओं में सरकारी अनुदान हड़पने के षडय़ंत्र की कलई

जैसलमेर, 21 मार्च (हि. स.)। गोसेवा के नाम पर गोशाला खोलकर सरकारी अनुदान हड़पने का खेल हाल ही में अनुदान राशि देने के लिए किए गए भौतिक सत्यापन में खुल गया है। पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से हाल ही में किए भौतिक सत्यापन में 25 गोशालाओं में से सिर्फ 4 गोशालाओं में ही भवन पाया गया, जबकि 21 ऐसी गोशालाएं मिली जहां छाया तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। बारह गोशालाओं में गोवंश था ही नहीं, जबकि अनुदान राशि का भुगतान किया जा चुका था। अब जिला प्रशासन ऐसी गोशालाओं के खिलाफ सख्ती बरतने का मानस बना रहा है। प्रदेश में गोवंश संरक्षण के लिए छोटी-बड़ी सैकड़ों गोशालाएं संचालित हैं। जिनमें से कम से कम दो साल पुराने पंजीयन व दो सौ या उससे अधिक गोवंश रखने वाली गोशालाओं को सरकार एक वित्तीय वर्ष में 90-90 दिन के दो चरणों में अधिकतम 180 दिनों के लिए अनुदान देती है। यह अनुदान गोवंश की उम्र के अनुसार 40 व 20 रुपए प्रतिदिन है। अनुदान प्राप्त गोशालाओं में गायों को रखने के लिए शेड या भवन होना भी आवश्यक होता है। लेकिन, जैसलमेर संभाग की अधिकांश गोशालाएं इन मापदंडों पर खरी नहीं उतर रही है। हाल ही में पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा गोशालाओं का आकस्मिक निरीक्षण करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पशुपालन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार जंज विकास संस्थान द्वारा संचालित गोशाला को पिछली बार 345 पशुओं के हिसाब से सरकार द्वारा 12 लाख 7 हजार 800 रुपए का भुगतान हुआ था, लेकिन इस बार अचानक हुए निरीक्षण के दौरान यहां एक भी गोवंश नहीं मिला। जबकि पिछले कई सालों से गोशाला संचालक करोड़ों रुपए का अनुदान उठा रहे थे। संस्थान के अध्यक्ष व सचिव अब्दुल खां है। इसी तरह चांधन के मंगलियों की ढाणी में मेवे खां द्वारा संचालित अमन गोशाला में पिछले साल 204 गोवंश के लिए 7 लाख 2 हजार रुपए का अनुदान दिया गया था, लेकिन इस साल भौतिक सत्यापन में एक भी गोवंश गोशाला में नहीं मिला। जबकि, इस गोशाला द्वारा भी पिछले सालों में लाखों रुपए का अनुदान उठाया गया है। जैसुराणा में इकबाल खां द्वारा संचालित गुल रोशन गोशाला में पिछले साल 333 पशुधन बताए गए थे। जिस पर पशुपालन विभाग द्वारा 11 लाख 61 हजार रुपए का अनुदान जारी किया गया था। इस बार हुए भौतिक सत्यापन में इस गोशाला में एक भी पशुधन नहीं मिला। जबकि हर साल इस गोशाला द्वारा लाखों रुपए अनुदान के नाम पर उठा लिए जाते है। हमीरा के जैसुराणा में ही संचालित चानणे विकास एवं सेवा संस्थान गोशाला में पिछली बार 315 गोवंश थे। जिसके लिए सरकार ने 10 लाख 78 हजार 200 रुपए का भुगतान भी जारी किया था। निरीक्षण के समय गोशाला में एक भी गोवंश नहीं मिला। सरकारी सूची के अनुसार इस संस्थान के अध्यक्ष व सचिव अजीज खां हैं। इसके साथ ही 9 ऐसी गोशालाएं भी सामने आईं। जिनमें पिछले साल की तुलना में इस साल गोवंश की संख्या कम पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार नसीर खां द्वारा संचालित ख्वाजा गरीब नवाज गोशाला में पिछले साल के 273 की तुलना में इस साल 26, बचल खां द्वारा संचालित मोहम्मद गोशाला सूजियों की ढ़ाणी में पिछले साल 205 की तुलना में इस साल 72, मिठी द्वारा संचालित चांधन स्थित पन्नोधराय गोशाला में पिछले साल 203 की तुलना में इस साल 71, चांधन की आईदान गोशाला में पिछले साल 325 की तुलना में 30, भागु का गांव की सदीक कोटवाल द्वारा संचालित जैसाण कादरी गोशाला में पिछले साल की 535 की तुलना में 230, जैसुराणा की खान मोहम्मद द्वारा संचालित दीन मोहम्मद गोशाला में पिछले साल की 381 की तुलना में इस साल 170, सायब खां द्वारा संचालित जन्नत गोशाला में पिछले साल 418 की तुलना में 80 व अलादीन द्वारा संचालित सिकंदर गोशाला में पिछले साल 455 की तुलना में इस साल 50, वृंदावन गोशाला में पिछले साल की 208 की तुलना में इस साल मात्र 77 गोवंश ही मिले। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीीप

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