बाड़मेर, 17 मई (हि.स.)। कोरोना महामारी ने लोगों की संवेदनाएं इस कदर खत्म कर दी हैं कि अब सगे बेटे तक अपनी मांओं को मरने के लिए अस्पतालों में छोड़ जा रहे हैं। ऐसा ही वाक्या बाड़मेर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार देर शाम हुआ। बाड़मेर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो बेटे अपनी मां को अस्पताल में भर्ती करवाकर लावारिस हालत में छोडक़र चले गए। जिस समय बेटे अस्पताल में अपनी मां को भर्ती करवा रहा था, तब भर्ती टिकट पर भी दामाद का नंबर लिखवाया गया। मेडिकल स्टाफ ने जब दामाद के नंबरों पर फोन किया और बेटे की करतूत की जानकारी मिली, तब बेटों ने अपनी मां को पहचानने से तक इनकार कर दिया। प्रदेश में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना महामारी में लोगों की संवेदनाएं खत्म कर दी हैं। अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ लोग अमानवीयता दिखा रहे हैं। बाड़मेर जिले में 80 साल की बुजुर्ग मां को बेटे ने कोरोना संक्रमित होने की आशंका के कारण अस्पताल में लावारिस छोड़ दिया। अस्पताल में करीब 12 घंटे बाद बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। रविवार को 2 बेटों ने अपनी बुजुर्ग मां को बाड़मेर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। भर्ती फॉर्म पर दामाद का नंबर भरवाकर चले गए। जब हॉस्पिटल स्टॉफ ने फोन किया तो दामाद ने कॉल रिसीव किया। उसने बेटों का नंबर दिया। जब उनको फोन किया गया तो पहचानने तक से इंकार कर दिया। आखिरकार सोमवार सुबह करीब 10 बजे बुजुर्ग महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। रविवार शाम करीब 6-7 बजे राय कॉलोनी निवासी कान सिंह (40) और अमर सिंह (42) गंभीर रूप से बीमार मां देवी (80) को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां इमरजेंसी में इलाज शुरू हुआ। साथ ही, बेटों को एक फार्म दिया गया। इसमें पूरा ब्योरा भरना था। बेटों ने अस्पताल स्टॉफ से अपने नंबर की जगह अपने बहनोई यानी बुजुर्ग महिला के दामाद का नंबर लिखवा दिया। इसके बाद वे धीरे से खिसक लिए। देवी को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। बेटों को आशंका हुई कि मां को कोरोना हो गया है। उधर, देवी का ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था। उसे इमरजेंसी से कोविड ओल्ड इमरजेंसी वार्ड में भेजा गया। इतने में परिजनों को खोजा गया। लेकिन बाहर कोई नहीं था। हॉस्पिटल के स्टॉफ ने फार्म पर लिखा नंबर मिलाया। वह नंबर दामाद सुखवीर सिंह का निकला। दामाद ने कहा कि वह शहर से दूर तेजमालता गांव में है। आने में वक्त लगेगा। उसने बेटों का नंबर दे दिया। स्टॉफ ने बेटों का नंबर मिलाया। बेटों ने मां को पहचानने से इंकार कर दिया। आखिरकार दामाद रात करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचा। उसने देवी का हाल-चाल जाना। मेल नर्स-2 विजय सिंह ने बताया कि रविवार देर शाम इमरजेंसी वार्ड से कोविड ओल्ड इमरजेंसी वार्ड में महिला को शिफ्ट किया था। दामाद सुखवीर सिंह ने बताया कि इनके बेटे मेरे नम्बर लिखवाकर अपनी ही मां को लावारिस हालात में अस्पताल में छोड़ कर चले गए। इनके बेटों ने मेरा फोन भी नहीं उठाया। गौरतलब है कि महिला की सोमवार को मौत होने के बाद उसके बेटों को जानकारी दी गई तब उसका एक बेटा अस्पताल पहुंचा। फिर दामाद और समाज के लोगों ने महिला का अंतिम संस्कार करवाया। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर




