जयपुर, 14 जून (हि.स.)। गहलोत सरकार के तकनीक शिक्षा मंत्री डॉ सुभाष गर्ग के शायराना ट्वीट करके पायलट समर्थक विधायकों पर निशाना साधने वाले बयान पर विवाद गहरा गया है। जिस तरह गर्ग ने बिना नाम लिए पायलट समर्थक विधायकों पर तंज कसा था, अब उसी तर्ज पर पायलट कैंप के विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने बिना नाम लिए पलटवार किया है। सुभाष गर्ग ने देर रात ट्वीट कर लिखा था कि ये मौसम ही है ऐसा, परिंदे आतुर हैं घोंसला बदलने के लिए। इस पर पायलट समर्थक वेदप्रकाश सोलंकी ने उसी अंदाज में सोमवार को सुभाष गर्ग पर जवाबी हमला बोला। वेदप्रकाश सोलंकी ने ट्वीट किया कि कुछ परिंदे खुद का घोंसला कभी नहीं बनाते, वे दूसरों के बनाए घोंसलों पर ही कब्जा करते हैं। खुद का मतलब पूरा होते ही फिर उड़ जाते हैं, अगले सीजन में फिर किसी का घोंसला कब्जा लेते हैं। घना से भटके ये परिंदे प्यास बुझाने के लिए कभी हैंडपंप तो कभी पोखर में चोंच मारते नजर आते हैं। सोलंकी ने नाम लिए बिना मंत्री सुभाष गर्ग के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी हमला बोला है। सोलंकी ने दूसरों के घोंसलों पर कब्जा करने वाले परिंदों का उदाहरण मुख्यमंत्री के लिए दिया है। पायलट कैंप शुरू से ही कह रहा है कि पायलट की वजह से ही कांग्रेस की सरकार आई और जब सीएम बनने की बारी आई तो उनकी जगह अशोक गहलोत को बना दिया। वेद प्रकाश ने उसी की तरफ इशारा किया है। सोलंकी ने सुभाष गर्ग की तरफ घना और हैंडपंप के जरिए इशारा किया है। घना पक्षी विहार भरतपुर में है और हैंडपंप राष्ट्रीय लोकदल आरएलडी का चुनाव चिन्ह है। सोलंकी पहले भी सुभाष गर्ग पर कई बार निशाना साध चुके हैं। सोलंकी ने पिछले दिनों नाम लेकर आरोप लगाया था कि पहली बार के विधायक होने के बाद भी मंत्री बनाए गए सुभाष गर्ग सरकार की नौ कमेटियों में हैं, जबकि टीकाराम जूली और भजनलाल जाटव जैसे मंत्री बाहर हैं। सोलंकी ने गर्ग पर यह आरोप भी लगाया था कि इस सरकार में एससी-एसटी समुदाय के खिलाफ जितने फैसले हुए हैं, उनमें सुभाष गर्ग मिले हुए हैं। इधर मीणा बोले-पायलट के साथ होने का मतलब कांग्रेस के खिलाफ नहीं पायलट समर्थक देवली उनियारा से कांग्रेस विधायक और पूर्व डीजीपी हरीश मीणा ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए जल्द गतिरोध को खत्म करने की नसीहत दी है। मीणा ने कहा है कि कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें जिताने वाले पूर्वी राजस्थान में विधायकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अफसर मनमानी कर रहे हैं और अफसरराज चल रहा है। हम सचिन पायलट के साथ हैं और रहेंगे लेकिन पायलट के साथ होने का मतलब कांग्रेस के खिलाफ होना नहीं है। राजस्थान में अभी जो गतिरोध चल रहा है उस कर अतिशीघ्र समाधान होना चाहिए। यह गतिरोध न कांग्रेस पार्टी के हित में है और न प्रदेश की जनता के हित में है। हमें लोगों ने काम करने के लिए जिताया है। कांग्रेस को सत्ता में लाने में पायलट साहब की अहम भूमिका थी। जनता ने उनके नेतृत्व में विश्वास जताया था। अब हालत यह हो गई है कि हम लोगों की सुनी नहीं जा रही है। हम विधायकों की ही जब नहीं सुनी जा रही है तो जनता में आक्रोश फैल रहा है क्योंकि उनके काम ही नहीं हो रहे। देवली उनियारा से कांग्रेस विधायक हरीश मीणा 2019 में टोंक पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ धरने पर बैठे थे। एक बजरी ट्रेक्टर चालक की पुलिस पिटाई से मौत के मामले में हरीश मीणा ने कई दिन अनशन और धरना दिया था। बाद में पायलट ने जाकर मीणा को धरने से उठाया था। उधर, बयानबाजी पर टूटा संयम का संयम, कहा-विरासत के सेवक ये कौनसा रूप दिखा रहे? प्रदेश में पायलट समर्थकों की ओर से लगातार गहलोत सरकार पर लग रहे आरोपों के बाद सोमवार को सिरोही के निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पार्टी के आलाकमान को ट्रेनिंग कैंप लगाने की नसीहत तक दे डाली। उन्होंने कहा कि विधायकों और कांग्रेस नेताओं को पता ही नहीं चलता कि कब-क्या बोलना चाहिए। पार्टी इनके लिए ट्रेनिंग कैंप करे और इन्हें बताएं कि किस समय क्या बोलना है और क्या नहीं। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के विधायक एक के बाद एक गहलोत सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। पिछले साल संयम लोढ़ा गहलोत खेमे के साथ सक्रिय थे। ऐसे में समझा जा रहा है कि इस बयान से वे पायलट समर्थकों को मैसेज दे रहे हैं। कांग्रेस में पिछले 10 दिन से चल रहे विवाद में पायलट समर्थक लगातार गहलोत सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले पायलट समर्थक वेदप्रकाश सोलंकी ने सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाकर सियासी हलचल मचा दी थी। अब पायलट समर्थक विधायक बृजेंद्र सिंह ओला और हरीश मीणा समेत अन्य विधायक गहलोत सरकार को अलग-अलग मुद्दों पर घेर रहे हैं। इस बीच सोमवार सुबह निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने इन विधायकों को ट्रेनिंग देने की सलाह दी। उन्होंने पार्टी आलाकमान को ट्वीट करते हुए लिखा कि…घोर अनुशासनहीनता के चलते राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी को प्रदेश स्तरीय चिंतन शिविर का आयोजन करना चाहिए। यह समझ तो बननी चाहिए कि हम महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की विरासत के सेवक है। विधायक लोढ़ा ने कहा कि पिछले 10-15 दिन से जो कुछ भी चल रहा है उसमें कैडर को समझना चाहिए। इस कोरोनाकाल में हम सबने जान पर खेल काम किया और इसके बाद ऐसे बयानों से आम कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। सिरोही से निर्दलीय विधायक पहले भी ट्वीट कर सियासत में हलचल मचा चुके हैं। 25 मार्च को भी उन्होंने सीएम अशोक गहलोत को ट्वीट कर लिखा था कि सांप जब तक आस्तीनों के न मारे जाएंगे… हौसला कितना भी हो, जंग हारे जाएंगे…। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप




