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स्कूल फीस मुद्दा:अभिभावकों को राहत देने की मांग,केंद्र और राज्य सरकार अभिभावकों के हित में लाये ऑर्डिनेंस

जयपुर,19 फरवरी (हि.स.)। कोरोना महामारी से चलते आ रहे स्कूल फीस विवाद राजस्थान हाईकोर्ट से निकलकर अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है, भले ही सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम ऑर्डर देने के साथ ही अब अपना ऑर्डर रिजर्व कर लिया हो किन्तु कही से भी अभिभावकों को राहत मिलती नही दिखाई दे रही है। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में निजी स्कूलों को वर्ष 2019 के अनुसार शत-प्रतिशत फीस वसूलने के आदेश देकर अभिभावकों पर अन्याय किया है। संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के शत-प्रतिशत फीस वसूलने के आदेश से प्रदेशभर के अभिभावकों गहरा आघात लगा है, निजी स्कूल संचालक इस आदेश का भी गलत इस्तेमाल कर अभिभावकों को ठगने की साजिश रच रहे है। केंद्र और राज्य की सरकार को तत्काल प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक अभिभावकों पर भी ध्यान आकर्षित कर संज्ञान लेना चाहिए। लोकसभा और विधानसभा में विशेष ऑर्डिनेंस लाकर अभिभावकों को राहत प्रदान कर निजी स्कूलों पर लगाम लगानी चाहिए। प्रदेश का अभिभावक पिछले 11 महीनों से राहत की गुहार लगा रहा है केंद्र और राज्य की सरकार को अभिभावकों का दर्द समझना चाहिए। अभिभावकों के पास आज 11 महीनों बाद भी ना काम-धंधे है ना कारोबार है ऐसी स्थिति में अब तक निजी स्कूल संचालक अभिभावकों प्रताड़ित, अपमानित और शोषित करते रहेंगे। जबकि केंद्र और राज्य की सरकार को अभिभावकों की स्थिति को समझना चाहिए कि जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल ही नही भेजा, ना ही ऑनलाइन क्लास अटेंड करवाई, ना ही स्कूलों से कोई सुविधा ली, वह अभिभावक उसकी फीस क्यो जमा कराएंगे, क्यो जबर्दस्ती कर निजी स्कूल संचालक अभिभावकों में डर का माहौल स्थापित कर रहे है। सरकार को समझना चाहिए कि कोरोना महामारी में निजी स्कूलों की हठधर्मिता के चलते अभिभावकों में अविश्वास का माहौल बन रहा है अगर अभिभावकों ने निजी स्कूलों से किनारा कर लिया तो यह सभी स्कूल संचालक केवल मुंह ताकते रह जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि निजी स्कूलों ने लॉकडाउन से स्कूल खुलने तक 50 से 70 फीसदी स्टाफ को घर बैठा दिया था, जो 30 से 50 फीसदी स्टाफ काम कर रहे थे उनकी सेलरी में 50 से 70 फीसदी तक कि कटौती कर दी थी, उसके बावजूद शत-प्रतिशत फीस की मांग करना निजी स्कूलों का कहा तक जायज है। आज स्कूल खुल गए है किन्तु आज भी स्कूलों ने पूरा स्टाफ वापिस नही बुलाया है। जबकि सबसे सामने है कोरोना महामारी से आज भी बहुत से अभिभावक बेरोजगार है, ना उनके पास काम-धंधे है, ना कारोबार है। उसके बावजूद निजी स्कूलों के आतंक और डर की वजह से हिन्दुस्थान समाचार/दिनेश/संदीप

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