जयपुर, 24 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को इस कार्यकाल का तीसरा बजट पेश किया। कोरोना महामारी के बाद राजस्थान में जादूगर कहे जाने वाले गहलोत के बजट पिटारा सभी के लिए खुला लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय उस पिटारे में खुद के लिए सौगातें ढूंढ़ता नजर आ रहा है। सामान्य रूप से होने वाले घोषणाओं से हटकर अलग से दिखने जैसा अल्पसंख्यम समुदाय की झोली में कुछ भी नहीं आया। इससे समुदाय में निराशा है। मुख्यमंत्री के बजट भाषण से इस बार मदरसा शब्द नदारद नजर आया। एमएसडीपी योजना के तहत पहले जारी कार्य बजट में रखे गए जिनमें 8 हाॅस्टल, 3 रेजिडेंशियल स्कूल, 3 माइनोरिटी गर्ल्स रेजिडेंशियल स्कूल और इतने ही बालक छात्रावास बजट में शामिल किए गए। इसके अलावा 17 स्वास्थ्य केंद भी बनाने की बात बजट में कही गई। बजट से पहले उर्दू से लेकर मदरसा और तालीम से लेकर रोजगार तक कई मांगें अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से सरकार को पहुंचाई गई थीं। इस मामले में अल्पसंख्यक समुदाय के और अल्पसंख्यक मामलात विभाग के मंत्री से लेकर समाज के सभी विधायकों से भी मांगें पहुंचाई गई, लेकिन सामने कुछ नहीं आया। बजट घोषणा के अनुसार राज्य के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में अध्ययन की सुविधा के लिए 8 अल्पसंख्यक बालक छात्रावास भवनों का निर्माण ब्लॉक लक्ष्मणगढ़-अलवर, ब्लॉक रायसिंहनगर व अनूपगढ़ श्रीगंगानगर, ब्लॉक मसूदा-अजमेर, फतेहपुर- सीकर, चूरू, झुंझुनूं एवं टोंक में करवाया जायेगा. जबकि भणियाना ब्लॉक साकड़ा-जैसलमेर, ब्लॉक रामगढ़-अलवर एवं उदयपुर में 3 राजकीय आवासीय विद्यालयों की स्थापना की जायेगी, जिस पर 62 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। सीकर, चैहटन-बाड़मेर व पहाड़ी (कामा)- भरतपुर में अल्पसंख्यक बालिका आवासीय विद्यालय खोला जाएगा। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर एवं कोटा संभाग मुख्यालय पर अल्पसंख्यक बालक छात्रावास खोले जाएंगे। राज्य के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बाड़मेर में तीन तथा अलवर व भरतपुर जिले में एक-एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही अलवर में 10, अजमेर में 5 तथा जैसलमेर में 2 उप स्वास्थ्य केन्द्र के भवनों का निर्माण कराया जाएगा। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कोई नई योजना की बात नहीं सामने आई, न वक्फ की सम्पत्ति की सुरक्षा और न कब्रिस्तान के विकास पर बात हुई। हज हाउस को भी इस बार बजट से दूर रखा गया। राजस्थान मुस्लिम फोरम, राजस्थान मुस्लिम प्रोग्रेसिव फ्रंट, मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ, मुस्लिम महासंघ आदि संगठनों ने सरकार को 8 से 14 सूत्रीय मांगे भेजी थीं, लेकिन बजट में कुछ नजर नहीं आया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल/संदीप




