जयपुर,21 मार्च (हि.स.)। रंगों का त्योहार होली देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। होली में हमें कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिएं, ताकि रंगों का हमारी सेहत पर कोई बुरा असर ना पड़े। वहीं डॉक्टर्स ने भी बाजार में बिक रहे सिंथेटिक केमिकल युक्त रंगों से सावधान रहने की सलाह दी है। चर्म रोग विशेषज्ञ चरक भवन एसएमएस अस्पताल के डॉ पुनीत भार्गव कहना है कि कि होली के त्योहार पर बाजारों में मिलने वाले केमिकल सिंथेटिक रंगों से आंखों के लिए काफी नुकसान हो सकता है। इन रंगों से त्वचा के एलर्जी के साथ आंखों में एलर्जी, त्वचा कैंसर, डर्माटाइटिस, दमा, निमोनिया, केमिकल बरन, आंखों में जलन, आंखों से पानी निकलना, आंखों में ब्लड-इंजरी, आंखों की भीतरी भाग में रक्त बहना, यहां तक कि आंखों की रोशनी भी जा सकती है। इसलिए हमें अच्छे रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। हो सके तो आंखों पर चश्मों का इस्तेमाल करना चाहिए। भार्गव ने बताया कि है कि सिंथेटिक रंगों से सावधानी नहीं बरती गई तो होली के रंग त्वाचा और आंखों के लिए घातक भी हो सकते है। वहीं घर में बनाए गए रंग हर प्रकार से बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों से बेहतर होते है और इन्हें घर में आसानी से बनाया जा सकता है। हल्दी को मैदे के साथ मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है। टेसू के फूलों की पत्तियों से केसरी रंग बनाया जा सकता है। चकुंदर को टुकड़ों में काटकर पानी में भिगोकर रखने से मैजेंटा रंग बनाया जा सकता है। घर में बनाए रंग जहां आंखों त्वचा के लिए सुरक्षित है। वहीं इनसे मिलने वाली प्राकृतिक महक अधिक आकर्षक होती है। बाजार में बिकने वाले रंग अधिकतर सिंथेटिक केमिकल युक्त होते है। इनमें भारी धातु सिक्का भी डाला गया होता है जो त्वचा और आंखों को हानि पहुंचाता है। गुलाल में भी चमकदार धातु माइका भी होता है। यहीं नहीं बच्चे होली वाले दिन गुबारों से होली खेलते है,जो खतरनाक है। हिन्दुस्थान समाचार/दिनेश/ ईश्वर




