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जेएलएफ : इतिहास, संस्मरण व महामारी के सत्र में श्रोता हुए ज्ञानवर्धक तथ्यों से लाभान्वित

जयपुर, 25 फरवरी (हि. स.)। साहित्य के कुंभ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन इतिहास, संस्मरण, महामारी, तकनीक, बुकर विजेता 2020 के साथ ही कई अन्य विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। पत्रकार श्रीनिवासन जैन से चर्चा करते हुए प्रसिद्ध अमेरिकी भाषाविद, दार्शनिक, इतिहासकार, सामाजिक आलोचक और राजनीतिक कार्यकत्र्ता, प्रोफेसर नोआम चोमस्की ने वैश्विक उथल-पुथल, ट्रम्प पश्चात् अमेरिका और उन तथ्यों पर बात की, जिन्होंने सुधारों को संभव बनाया। उन्होंने हाल ही में हुए यूनाइटेड स्टेट कैपिटल के घेराव की घटना और उसके बाद आए बदलाव पर अपने विचार रखे। चोमस्की ने कहा कि बदलाव कोई जादू की छड़ी नहीं है, इसके लिए आपको लडऩा पड़ता है। उन्होंने एकजुटता और निरंतर समर्पित संघर्ष के साथ आने के महत्व को स्वीकारा। स्कॉटिश-अमेरिकन लेखक डगलस स्टुअर्ट ने तीसरे दिन के सत्र में लेखक और नाटककार पॉल मैकवे को अलग अंदाज में अपना परिचय दिया। डगलस को अभी हाल ही में उनके पहले उपन्यास शगी बेन के लिए वर्ष 2020 का बुकर प्राइज प्रदान किया गया है। आयरिश लेखक कॉलम मैकेन ने श्रीलंकाई लेखिका और कार्यकत्र्ता फ्रीमैन से अपनी किताब अपेरोगोन और कभी न ख़त्म होने वाली आशा पर बात की। अनुसंधान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बर्ड रिंगिंग सेंटर का जिक़्र किया। एक प्रभावशाली सत्र में प्रोफेसर विन्सेंट ब्राउन ने प्रोफेसर माया जेसनोफ़ से अपनी किताब ‘टैकी’स रिवोल्ट’ पर चर्चा की। ये किताब एटलान्टिक के दास व्यापार के इतिहास, विद्रोह और हार-जीत की कथा सुनाती है। द डेथ ऑफ़ लिब्रलिस्म सत्र के दौरान पत्रकार और लेखक जॉन मिक्लेट ने अमेरिकी लेखक एडम गोपनिक के साथ इस विषय पर सार्थक चर्चा की। प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, लेखक, विद्वान और अनुवादक बिबेक देबरॉय ने इन दुविधाओं और उनमें निहित नैतिक और कर्मगत विकल्पों की बात की। इस गहन सत्र में उन्होंने कीर्थिक शशिधरण से बात की, जिनका उपन्यास द धर्म फोरेस्टो अभी हाल ही में प्रकाशित हुआ है। रेकेट बेंकिसर के सहयोग से आयोजित सत्र टिल वी विन : इंडिया’स फाइट अगेंस्ट द कोविड-19 पेंडेमिक में डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, चंद्रकांत लहरिया और गगनदीप कंग ने पत्रकार माया मीरचंदानी से बात की। फेस्टिवल के पहले वीकेंड की समाप्ति पर ऑल पॉवर करप्ट शीर्षक से एक बहस का आयोजन किया गया, जिसमें लेखक अमीश त्रिपाठी व पवन के. वर्मा, डच पत्रकार किम घेट्स, भारतीय राजनेता पिनाकी मिश्रा, प्रसिद्ध वकील पिंकी आनंद और स्तंभकार सुहेल सेठ शामिल रहे। अंत में, जबकि सभी पैनलिस्ट आपसी समझ पर सहमत थे, लेकिन श्रोताओं ने बेखटके पोल द्वारा अपना चुनाव किया। उन्होंने ऑल पॉवर करप्ट के पक्ष को विजेता बनाया। सप्ताहांत भी अनिरुद्ध वर्मा कलेक्टिव, रहमत-ए-नुसरत और ‘बिलोंगिंग’, जैसन ओ’रुर्के व दीपमोय दास की मधुर प्रस्तुतियों से गूंजता रहा। आइकोनिक फेस्टिवल के इस 14वें संस्करण का आयोजन विशेष वर्चुअल प्लेटफार्म पर 28 फरवरी तक किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप

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