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अधीनस्थ न्यायालय की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का छह सप्ताह का स्थगन, सरकार को राहत

चित्तौड़गढ़, 24 फरवरी (हिस)। शहर में नगर परिषद के सामने एक बेशकीमती भूखंड के मामले राज्य सरकार बनाम आशादेवी में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है। राजस्थान हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय की कार्रवाई को छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। ऐसे में अधीनस्थ न्यायालय की और से मंगलवार को दिए आदेश चित्तौड़गढ़ कलक्टर, एसपी व तहसीलदार की कुर्सी कार और आवास की कुर्की के आदेश के बाद होने वाली कार्रवाई भी छह सप्ताह के लिए स्थगित हो गई है। जानकारी के अनुसार आशादेवी बनाम राज्य सरकार मामले में बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है। राज्य सरकार ने प्रार्थी बन कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने राज्य सरकार को राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय की कार्रवाई को छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। ऐसे में अधीनस्थ न्यायालय की कार्रवाई छह सप्ताह के लिए रुक गई है। ऐसे में अधीनस्थ न्यायालय अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट चित्तौड़गढ़ की और से मंगलवार को चित्तौड़गढ़ कलक्टर, एसपी व तहसीलदार के आवास, कुर्सी व कार को कुर्की की कार्रवाई के आदेश पर भी कार्रवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार को राहत मिली है। अधीनस्थ न्यायालय ने दिया था कुर्की की कार्रवाई का आदेश प्रकरण के अनुसार सन 1994 में चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन जिला कलेक्टर डॉ आरएस गठाला द्वारा अपने कार्यकाल में यहां नगर परिषद के सामने स्थित बेशकीमती भूमि को विवादास्पद बताते हुए कब्जा कर यह जमीन पुलिस विभाग को सौंप दी थी। इस प्रकरण को भूखंड मालिक द्वारा न्यायालय में चुनौती दी गई। इस पर न्यायालय ने 2004 में आशादेवी को कब्जा देना का आदेश दिया था। लेकिन इन्होंने जमीन वादी को नहीं दी थी। न्यायालय द्वारा भूखंड मालिक के पक्ष में फैसला दिए जाने पर जिला कलेक्टर पुलिस अधीक्षक द्वारा इस निर्णय के खिलाफ न्यायालय में अपील की गई, लेकिन 2018 में या अपील खारिज होने के बाद भूखंड मालिक को इसका कब्जा नहीं मिल सका। वादी आशादेवी ने अपने अधिवक्ता सावन श्रीमाली के मार्फ़त कोर्ट में पालना का आवेदन किया था। न्यायालय ने कलक्टर, एसपी आदि को न्यायालय में पेश होने के कई मौके दिए थे। लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे। मामले में न्यायालय अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट चित्तौड़गढ़ अमित दवे ने मंगलवार को तीनों के खिलाफ कुर्की वारंट जारी करने का आदेश दिया है। न्यायालय में वादी आशादेवी के वकील सावन श्रीमाली ने कार, कुर्सी व आवास की सूची दी थी। इस पर न्यायाधीश ने कलक्टर, एसपी तहसीलदार की कुर्सी, कार व आवास कुर्क करने के लिए वारंट जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही न्यायालय में कलक्टर व एसपी की और से प्रार्थना पत्र 47 पेश किया था। इसे भी न्यायालय ने कलक्टर के प्रार्थना पत्र को 5 हजार रुपए की व एसपी के नाम हटाने वाले प्रार्थना पत्र को 1 रुपए की कोस्ट पर खारिज करने का आदेश दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/अखिल/संदीप

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