उदयपुर, 09 जून (हि.स.)। उदयपुर संभाग के सबसे बड़े राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय में दो दिन पहले ही शुरू की गई पार्किंग की डिजिटल शुल्क की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि, इस पार्किंग पर पहले ही दिन से सवाल उठ गए थे क्योंकि शुल्क के बाद भी वहां लिखी शर्तों में यह अंकित किया गया है कि वाहन चोरी हो जाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की नहीं होगी। ऐसे में पार्किंग का मोटा शुल्क, वह भी कतार में खड़े रहकर चुकाने के बाद भी वाहन सुरक्षित नहीं है, तो सवाल उठने ही थे। इतना ही नहीं, पार्किंग शुल्क लिए मुख्य द्वार के नजदीक ही केबिन लगा दिए गए हैं जिससे अचानक प्रवेश करने वाले को भान ही नहीं हो पाता कि आगे पार्किंग शुल्क चुकाने वालों की कतार लगी है। अब इस मुद्दे को भाजपा ने दाल में काला बताकर अस्पताल प्रशासन को चेतावनी दे दी है। भाजपा के जिलाध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली ने बुधवार को बयान जारी कर सीधे-सीधे अस्पताल प्रशासन को चेतावनी दी कि इस लूट के धंधे को नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो दिन में इस नई डिजिटल पार्किंग व्यवस्था को लेकर शहर के हर वर्ग ने नाराजगी जाहिर की है। श्रीमाली ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि वह अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था को सुदृढ़ करे। चोरी होने वाले वाहनों की घटनाओं को भी पुलिस के साथ मिलकर गंभीरता से ले। पार्किंग से ही वाहन चोरी हो जाते हैं तब पार्किंग का क्या लाभ। उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि इस व्यवस्था के इतने विरोध के बाद भी इस निर्णय को लागू करने की जिद से लगता है कोई गड़बड़ जरूर है। भारतीय जनता युवा मोर्चा शहर जिला अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी ने भी आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन न तो जनप्रतिनिधियों की बात मान रहा है और मेडिकल रिलीफ सोसायटी के सुझावों को भी दरकिनार कर रहा है। यदि यह व्यवस्था नहीं हटाई गई तो भाजयुमो आंदोलन पर उतरेगा। भाजपा मीडिया प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल ने इस पार्किंग शुल्क को अस्पताल का प्रवेश शुल्क बताते हुए कहा कि विभिन्न विभिन्न संगठनों ने संपर्क कर अस्पताल प्रशासन के इस निर्णय पर आक्रोश व्यक्त किया है और कहा है कि यह सरकारी अस्पताल है। यहां पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपना निःशुल्क इलाज कराने आता है जहां पर सरकार उन मरीजों के इलाज का पैसा नहीं लेती है तो उनके इलाज हेतु अस्पताल परिसर में प्रवेश का शुल्क लागू करना कहां तक उचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निश्चित रूप पैसे के लेनदेन का बड़ा मामला प्रतीत होता है या फिर मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर मोड़ने का। उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय मरीज अस्पताल जाने के लिए ऑटो लेता है। यदि ऑटो वाला 50 रुपये किराया तय करता है और कुछ देर वहां रुकना हो तो 20 रुपये तो प्रवेश शुल्क में ही चले जाएंगे। इसका भार भी गरीब मरीज पर पड़ने वाला है। यदि बुजुर्ग आदमी को दिन में दो-तीन बार आना पड़ जाए, तो निःशुल्क उपचार पर प्रवेश शुल्क भारी होगा। उदयपुर दाल चावल व्यापार संघ के अध्यक्ष गणेश अग्रवाल एवं सचिव राजकुमार चित्तौड़ा ने कहा कि इस तरह के डिजिटल पार्किंग के नाम पर यह फैसला जबरदस्ती आमजन पर थोपा जा रहा है। अश्विनी बाजार व्यापार संघ के शेष चंपावत ने बताया कि इस निर्णय से अस्पताल के हाथीपोल की तरफ वाले द्वार पर नई समस्या शुरू हो जाएगी। लोग अपने वाहन इस द्वार के आसपास खड़े कर पैदल अंदर प्रवेश करेंगे क्योंकि यहां से इमरजेंसी नजदीक पड़ती है। उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष शर्मा के सान्निध्य में अधिवक्ताओं ने भी जिला कलेक्टर से भेंट कर इसमें हस्तक्षेप कर किसी भी सूरत में पार्किंग के बदले प्रवेश शुल्क को हटाने का आग्रह किया है। पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल, रामकृपा शर्मा, महेंद्र नागदा सहित अशोक सिंघवी, दिनेश गुप्ता, योगेंद्र दशोरा आदि ने भी नई व्यवस्था और बढ़े हुए पार्किंग शुल्क का विरोध किया है। उदयपुर ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने भी इस व्यवस्था को जनहित विरोधी बताया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल/संदीप




