नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। बीजोलिया थाना क्षेत्र के जंगल में एक महज 15 दिन का नवजात झाड़ियों में मिला, जिसके होंठ गोंद से चिपकाए गए थे और मुंह में पत्थर ठूंसा गया था। इरादा साफ था। बच्चा रो न सके और कोई उसकी आह भी न सुन सके, लेकिन कहते हैं कि, कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती। समय रहते एक चरवाहे की नजर उस मासूम पर पड़ी और उसने बच्चे की जान बचा ली।
झाड़ियों में जिंदगी की आखिरी सांसें ले रहा था मासूम
घटना मंडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बीजोलिया कस्बे की है। मंगलवार सुबह एक स्थानीय चरवाहा अपने मवेशियों को चराने जंगल की ओर गया था। तभी उसकी नजर झाड़ियों में कुछ हलचल पर गई। पास जाकर देखा तो उसके होश उड़ गए एक नवजात शिशु पड़ा हुआ था, जिसके होंठ किसी मजबूत गोंद से चिपकाए गए थे, और मुंह के भीतर पत्थर ठूंसे हुए थे।चरवाहे ने हिम्मत दिखाई, फौरन बच्चे के मुंह से पत्थर निकाले और पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस जांच में जुटी, मां-बाप की तलाश जारी
सूचना मिलते ही बीजोलिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी ने बताया कि सीता कुंड मंदिर क्षेत्र के पास यह बच्चा मिला। पुलिस अब आसपास के गांवों में हाल ही में हुए प्रसव की जानकारी इकट्ठा कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नवजात को यहां किसने और क्यों फेंका। पुलिस के अनुसार, यह सिर्फ एक क्राइम नहीं, इंसानियत पर किया गया कातिलाना वार है। बच्चे के साथ की गई यह हरकत हैवानियत की सारी हदें पार कर गई।
अस्पताल में उपचार जारी, CMHO भी कर रहे निगरानी
शिशु को जिस समय अस्पताल लाया गया, उसकी हालत नाजुक थी। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और अब स्थिति स्थिर बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ कार्यालय भी खुद पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
समाज को झकझोर गई यह घटना
भीलवाड़ा में घटी यह घटना न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर रही है। लोग सोशल मीडिया पर भी इस क्रूरता की निंदा कर रहे हैं और दोषियों को जल्द पकड़ने की मांग कर रहे हैं। जब समाज इतना संवेदनहीन हो जाए कि एक नवजात की चीख भी खतरा बन जाए, तब सवाल उठता है हम किस दिशा में जा रहे हैं?





