नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र सरकार में बीती रात हुए अहम मंत्रालय फेरबदल के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे को कृषि मंत्री पद से हटा दिया गया है। अब उन्हें खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फेरबदल ऐसे समय पर हुआ है जब कोकाटे हाल ही में ‘रमी गेम’ खेलते हुए एक वायरल वीडियो को लेकर विवादों में घिर गए थे, जिसे लेकर विपक्ष ने तीखी आलोचना की थी। वहीं, मौजूदा खेल मंत्री दत्तात्रेय भरणे को अब राज्य का नया कृषि मंत्री बनाया गया है। यह निर्णय राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से सार्वजनिक किया गया।
माणिकराव कोकाटे को अब मिला ये जिम्मा
महाराष्ट्र सरकार में हुए हालिया फेरबदल के तहत माणिकराव कोकाटे को कृषि विभाग से हटाकर अब खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें अल्पसंख्यक विकास और औकाफ विभाग (Auqaf Department) का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं, अब तक खेल मंत्री रहे दत्तात्रेय भरणे को नया कृषि मंत्री बनाया गया है। भरणे महाराष्ट्र के पुणे जिले के इंदापुर से विधायक हैं, जबकि कोकाटे नासिक जिले के सिन्नर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों ही नेता उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट से जुड़े हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद पर हैं।
क्यों छीना गया माणिकराव कोकाटे से कृषि मंत्रालय?
महाराष्ट्र सरकार में हुए फेरबदल के पीछे की बड़ी वजह मंत्री माणिकराव कोकाटे से जुड़ा विवादास्पद आचरण बताया जा रहा है। कोकाटे हाल ही में उस समय विवादों में आ गए थे, जब महाराष्ट्र विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे मोबाइल पर ऑनलाइन ‘रमी’ गेम खेलते नजर आए। यह वीडियो शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार और जितेंद्र आव्हाड द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
यह पहली बार नहीं है जब कोकाटे आलोचना के केंद्र में आए हों। इससे पहले उन्होंने एक बयान में किसानों की तुलना भिखारियों से कर दी थी, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इससे पहले भी अजित पवार गुट के एक और मंत्री धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था, जब उनके करीबी वाल्मीक कराड को संतोष देशमुख हत्याकांड में मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि माणिकराव कोकाटे से कृषि मंत्रालय छीने जाने का फैसला सरकार की छवि को बचाने और मंत्रियों की जवाबदेही तय करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।




