नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए नौ दिन बीत चुके हैं और राज्य को अभी तक अपना मुख्यमंत्री नहीं मिला है। महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर अभी तक सस्पेंस बरकरार है। मुख्यमंत्री का चयन करने में हो रही देरी के बीच सोमवार को होने वाली महायुति गठबंधन की बैठक कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उपस्थित नहीं होने के कारण एक बार फिर रद्द कर दी गई है। पिछले चार दिनों में यह बैठक दूसरी बार रद्द हुई है। फिलहाल शिंदे ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि वह खुद उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभाएंगे या अपने किसी करीबी को इस पद पर नियुक्त करेंगे।
शिवसेना विधायकों ने एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना, जबकि एनसीपी विधायकों ने सर्वसम्मति से अजित पवार को विधायक दल का नेता चुना। भाजपा अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए बुधवार (4 दिसंबर) को विधायकों की बैठक करेगी। महाराष्ट्र में सरकार गठन से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए सोमवार को यह बैठक होनी थी और कार्यवाहक मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो एकनाथ शिंदे द्वारा बीमारी के कारण डॉक्टरों द्वारा आराम करने की सलाह दिए जाने के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
एनसीपी अध्यक्ष और कार्यवाहक उपमुख्यमंत्री अजीत पवार दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कैबिनेट पदों के बंटवारे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच मंत्रालयों के बंटवारे के फार्मूले पर चर्चा करेंगे। अजीत पवार की अगुआई वाली एनसीपी ने मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस को अपना समर्थन देने की घोषणा की है, जबकि शिंदे ने कहा है कि वे कोई बाधा या गतिरोधक नहीं बनेंगे, बल्कि वे मुख्यमंत्री पद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का पालन करेंगे।
इससे पहले शिंदे, फडणवीस और अजीत पवार ने सरकार गठन पर चर्चा के लिए बीते शुक्रवार को मिलने का इरादा किया था, लेकिन शिंदे के सतारा जिले में अपने गृहनगर डेरे चले जाने के बाद बैठक स्थगित कर दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक अस्वस्थ महसूस कर रहे शिंदे रविवार शाम को सतारा जिले के अपने गृहनगर दारे से लौटे और फिलहाल अपने डॉक्टर की सलाह पर ठाणे स्थित अपने आवास पर आराम कर रहे हैं। उन्होंने रविवार को संवाददाताओं से कहा था कि वह और दो उपमुख्यमंत्री सोमवार को मुख्यमंत्री पद, विभागों के बंटवारे और नए मंत्रिमंडल में पार्टीवार पदों पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले ढाई साल में उन्होंने आम आदमी के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया है। उन्होंने कहा कि लोग चाहेंगे कि वह फिर से मुख्यमंत्री बनें। इधर, भाजपा नेतृत्व में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की भारी जीत के मद्देनजर। पार्टी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पर्यवेक्षक बनाया है।





