नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव में मिली करारी हार पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चुनाव भारी धनबल और सत्ता की ताकत बनाम शिवशक्ति के बीच था और मनसे को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन पार्टी हताश नहीं है और हार मानने वाली नहीं है। उन्होंने चुने गए मनसे पार्षदों को बधाई दी और कहा कि वे सत्ताधारी ताकतों के सामने जमीन पर मजबूती से खड़े रहेंगे। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणामों का गहन विश्लेषण किया जाएगा और जो गलत हुआ, जो छूट गया, जहां कमी रह गई और आगे क्या करना है, उसका मिलकर अध्ययन कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
”मराठी भाषा, अस्मिता और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए काम करेंगे”
उन्होंने मनसे के मूल सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा कि पार्टी मराठी लोगों, मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए संघर्षरत है और सत्ताधारी दल तथा उनके समर्थक मराठी लोगों को परेशान करने और शोषित करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद एक साथ आए
ठाकरे ने यह भी कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन उनकी सांस मराठी है और इसे कभी नहीं भूलना चाहिए। इस चुनाव का खास महत्व इसलिए भी था क्योंकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद एक साथ चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन यह गठजोड़ राज्य स्तर पर सफल नहीं हो सका, जबकि बीजेपी नीत महायुति गठबंधन ने बीएमसी समेत राज्य की 24 नगर निगमों में जबरदस्त जीत हासिल की और बीजेपी 1,425 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 399 और अजीत पवार की एनसीपी को 167 सीटें मिलीं, वहीं मनसे को कुल 13 सीटें ही मिलीं और मुंबई की 227 सदस्यीय बीएमसी में मनसे को केवल 6 सीटें मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मराठी अस्मिता के मुद्दे पर मनसे का प्रभाव कमजोर पड़ा, हालांकि ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि अगर मराठी लोगों के खिलाफ कोई कदम उठाया गया तो चुने हुए पार्षद सत्ता को घुटनों पर ला देंगे।





