नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने वसई में आयोजित एक चुनावी रैली में एक बार फिर विवादित बयानबाजी कर राजनीतिक पारा बढ़ा दिया। राणे ने अपने भाषण में एक विशेष समुदाय को ‘हरा सांप’ कहकर निशाना साधा और आई लव मोहम्मद कहने वालों को पाकिस्तान भेजने की बात कही। उनके इस बयान ने राज्य में सियासी और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है।
”कोई भी हरा सांप आपकी तरफ गंदी नजर से नहीं देख सकता”
महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने वसई में आयोजित एक चुनावी रैली में एक बार फिर विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा,कोई भी हरा सांप आपकी तरफ गंदी नजर से नहीं देख सकता। इतनी ताकत से आपके साथ खड़े रहेंगे। हिंदुओं के त्योहार में कोई भी मस्ती करने की कोशिश करेगा तो उसे वापस सरेंडर करना पड़ेगा।
”जय श्रीराम बोलने वाला ही हमें शहर में दिखाई देना चाहिए”
नितेश राणे ने अपने बयान में यह भी कहा कि महाराष्ट्र की सरकार हिंदुत्ववादी सोच वाली है और मुख्यमंत्री तथा मेयर का चुनाव भी हिंदुत्ववादी सोच वाले ही करेंगे। उन्होंने रैली में कहा,जय श्रीराम बोलने वाला ही हमें शहर में दिखाई देना चाहिए। बाकी ‘आई लव मोहम्मद’ वाले पाकिस्तान भेज दिए जाएं। उनके इस बयान ने विपक्ष और समाज के कई वर्गों में नाराजगी पैदा कर दी।
”सभी हिंदू मतदाताओं को एकजुट होना चाहिए”
नितेश राणे का यह बयान सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट रहना होगा और मुंबई का मेयर हिंदू और मराठी होना चाहिए। उनके अनुसार, इस बार महायुति की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी हिंदू मतदाताओं को एकजुट होना चाहिए।
नितेश राणे की बयानबाजी अक्सर विवाद पैदा करती है
विश्लेषकों का कहना है कि नितेश राणे लगातार ऐसे बयान देकर चुनावी माहौल गरम करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी नितेश राणे कई बार विवादित बयानबाजी कर सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके वोट का मतलब पाकिस्तान में बैठे उनके अब्बा को वोट देना है। नितेश राणे की यह बयानबाजी बार-बार सुर्खियों में रहती है और अक्सर विवाद पैदा करती है।
बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में जुटी
राजनीतिक दलों और समाज के कई वर्गों ने उनके बयान की कड़ी निंदा की है। विपक्षी नेता और नागरिक समाज के संगठन इसे सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ करार दे रहे हैं। कुछ विश्लेषक इसे आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं, जहां बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में जुटी है।





