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Monday, March 2, 2026
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पहली महिला डिप्टी CM सुनेत्रा पवार को मिली इस जिले के देखरेख की जिम्मेदारी, अजित पवार की विरासत संभालेंगी

महाराष्ट्र सरकार ने डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिले का पालक मंत्री नियुक्त किया है, इससे उनके प्रशासनिक दायित्व और सियासी कद में इजाफा हुआ।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र सरकार ने डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिले का गार्जियन मिनिस्टर यानी पालक मंत्री नियुक्त कर दिया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अजित पवार के पास थी। हालांकि शपथ के बाद सुनेत्रा पवार को वित्त मंत्रालय नहीं मिला, लेकिन उन्होंने एक्साइज, स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर, अल्पसंख्यक विभाग और वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी संभाल रखी है। अब इन सभी विभागों के साथ उन्हें दो बड़े जिलों की देखरेख भी करनी होगी, जिससे उनकी राजनीतिक भूमिका और भी मजबूत हो गई है।

बीड के पालक मंत्री का सफर: धनंजय मुंडे से अजित पवार तक

दिवंगत अजित पवार से पहले बीड जिले के पालक मंत्री की जिम्मेदारी धनंजय मुंडे संभाल रहे थे। लेकिन सरपंच संतोष देशमुख मर्डर केस में उनके करीबी का नाम सामने आने के बाद, मुंडे ने महाराष्ट्र के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अजित पवार के पास चली गई।

पालक मंत्री: जिले का प्रमुख ‘सियासी गार्ड’

महाराष्ट्र सरकार पालक मंत्री या प्रभारी मंत्री की नियुक्ति करती है, जो कैबिनेट स्तर का मंत्री होता है। इस पद का मुख्य काम किसी जिले में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय देखना होता है। राज्य में जिन नेताओं को यह जिम्मेदारी मिलती है, उनका सियासी कद बड़ा माना जाता है, क्योंकि यह पद जनता से सीधे संपर्क का भी जरिया है। यही वजह है कि हर बड़े नेता चाहता है कि वह अपने इलाके का पालक मंत्री बने। इसी कड़ी में, अजित पवार लंबे समय तक पुणे के पालक मंत्री रहे और इस पद से उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत किया।

सभी 36 जिलों में पालक मंत्री नियुक्त

महाराष्ट्र के सभी 36 जिलों में पालक मंत्री नियुक्त किए गए हैं। इस लिस्ट में बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं। सीएम फडणवीस गढ़चिरौली के पालक मंत्री हैं, जबकि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ठाणे और मुंबई शहर के जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, महाराष्ट्र बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले नागपुर जिले के पालक मंत्री के तौर पर सक्रिय हैं। ऐसे पद नेताओं को न सिर्फ प्रभाव और पहचान देते हैं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने का मौका भी देते हैं।

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