नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे कार एक्टीडेंट केस और पेचीदा बनता जा रहा है। बता दें कि इस मामले में नाबालिग को बचाने के लिए जितनी कोशिशे की जा रही है, उससे परत दर परत पूरा सिस्टम खुलता जा रहा है। इस मामले में ससून जनरल अस्पताल के डॉक्टर अजय तावड़े को हिरासत में ले लिया गया हैं। उनके ऊपर नाबालिग के बल्ड सैंपल बदलने का आरोप है। मामले में नाबालिग द्वारा ही कार एक्सीटेंड कर दो लोगों को कुचल दिया गया था। मामले में एनसीपी के विधायक सुनील टिंगरे का नाम शामिल हुआ था। बता दें कि सांसद के ऊपर आरोप लगे हैं कि उनके दबाव में नाबालिग को जमानत दी गई थी।
डॉक्टर अजय पहले से हैं बदनाम
बताते चलें कि डॉक्टर अजय तावड़े का नाम का 2022 के एक किडनी रैकेट में भी सामने आया था। उन्हें उस साल अपना पद छोड़ने के लिए कहा गया था, जब गैर कानूनी तरीके के अंग प्रत्यारोपण का मामला उजागर हुआ था। यह मामला रूबी हॉल क्लीनिक में हुआ था। रैकेट का पता तब चला जब एक महिला के डॉक्टर के खिलाफ किडनी देने के बदले 15 लाख रुपए देने का वादा किया। जिसके बाद महिला ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दायर कर दी थी। डीएमईआर ने डॉक्टर तावड़े को ससून अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद से हटा दिया गया था लेकिन 29 दिसंबर 2023 को उन्होंने दोबारा पदभार संभाला।
एनसीपी विधायक सुनील टिंगरे का रहा पीछे हाथ
विधायक सुनील का नाम केवल नाबालिग को जमानत दिलाने के समय सामने नहीं आया, बल्कि डॉक्टर अजय द्वारा अस्पताल में पदभार संभालने के पीछे भी उन्हीं का हाथ रहा था। बता दें कि विधायक अजीत पवार गुट की पार्टी से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने राज्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुशरिफ को पत्र लिख डॉक्टर अजय को पुणे में राज्य द्वारा चलाए जा रहे एक अस्पताल में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट पद देने की सिफारिश की।
और कौन आया हिरास्त में?
बता दें कि डॉक्टर तावड़े के अलावा, राज्य द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड, CMO डॉक्टर श्रीहरि हलनोर और स्टाफ अतुल घाटकांले भी पुणे पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जा चुके हैं। बता दें कि ये दोनों डॉक्टर अजय तावड़े के अंडर काम करते थे।
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