नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति में फर्जी वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) का मुद्दा एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) ने सीधे चुनाव आयोग और प्रशासन को चुनौती देते हुए साफ कहा है कि अगर सूची में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो वे चुनाव नहीं होने देंगे। यह चेतावनी पार्टी नेता आनंद दुबे ने वर्ली में आदित्य ठाकरे की सभा के बाद मीडिया को दी।
ठाकरे का दावा और ‘वोट चोरी’ का आरोप
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने सोमवार को वर्ली विधानसभा में एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से वोटर लिस्ट में कई गंभीर गड़बड़ियों का दावा किया। उन्होंने अकेले वर्ली में 19 हजार फर्जी वोटर होने का आरोप लगाया।
आनंद दुबे ने जोर देकर कहा कि उनके पास ठोस सबूत हैं, जैसे, एक घर में 50 से ज़्यादा लोग वोटर कैसे हो सकते हैं? कैसे एक पते पर 500 लोग वोटर हो सकते हैं
उद्धव गुट ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए कहा कि इसकी मुहिम कुछ महीने पहले राहुल गांधी ने शुरू की थी, और अब आदित्य ठाकरे ने इसे महाराष्ट्र में उजागर किया है।
उद्धव गुट की ‘आर-पार’ की रणनीति
शिवसेना (UBT) ने इस मुद्दे को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति साफ कर दी है, जो आगामी बीएमसी और अन्य चुनावों को सीधे प्रभावित कर सकती है:
आनंद दुबे ने साफ शब्दों में कहा, “जब तक मतदाता सूची में पारदर्शिता नहीं होगी, हम चुनाव नहीं होने देंगे।” यह बयान चुनाव प्रक्रिया को रोकने की राजनीतिक मंशा को स्पष्ट करता है।
दबाव बनाने की रैली: इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए, यूबीटी ने 1 नवंबर को मुंबई में एक बड़ी रैली की घोषणा की है।
यह मुद्दा ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए एक साझा हथियार बन गया है। फर्जी वोटर लिस्ट पर मुखरता आगामी चुनावों में एक प्रमुख चुनावी एजेंडा बनने की उम्मीद है।
यह राजनीतिक दबाव दर्शाता है कि उद्धव गुट इस मुद्दे को ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप मानते हुए, महाराष्ट्र में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।




