नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में इन दिनों बारामती प्लेन हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही विपक्ष, खासकर शिवसेना (यूबीटी), लगातार सरकार पर हमलावर हो गया है। शिवसेना यूबीटी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में बीजेपी और एनसीपी (अजित पवार गुट) पर तीखा प्रहार करते हुए इस शपथ समारोह को जल्दबाजी और राजनीतिक साजिश का परिणाम बताया है। सामना के लेख में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस को इस पूरी प्रक्रिया के पीछे की मुख्य ताकत करार दिया गया है, वहीं मौजूदा राजनीतिक हालात को “घटिया राजनीति” बताते हुए सरकार की नीयत और फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
शोक में डूबे महाराष्ट्र में सत्ता की जल्दबाजी पर सवाल
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना के संपादकीय में डिप्टी सीएम के शपथ समारोह को महाराष्ट्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया है। लेख के मुताबिक, अजित पवार के निधन के बाद पूरा राज्य शोक में था, लेकिन उसी दौरान सत्ता की जल्दबाजी दिखाकर संवेदनशीलता और परंपराओं की अनदेखी की गई। सामना ने आरोप लगाया कि जो बीजेपी हिंदुत्व और संस्कृति की बात करती है, वही शोक काल में अपने रीति-रिवाजों का पालन करती नहीं दिखी। संपादकीय में शोक के समय सत्ता प्रदर्शन को “बेहद घटिया राजनीति” करार देते हुए सरकार की नीयत और फैसलों पर तीखे सवाल खड़े किए गए हैं।
सुनेत्रा पवार की उप मुख्यमंत्री नियुक्ति पर उठे सवाल
संपादकीय में सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी कड़ी आलोचना की गई है। सामना का कहना है कि यह पद उनकी व्यक्तिगत काबिलियत या राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं दिया गया, बल्कि पूरी तरह सत्ता संतुलन और अंदरूनी जोड़तोड़ का परिणाम है। लेख में तंज कसते हुए लिखा गया कि शरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि परिवार को भी इस शपथ समारोह की पूर्व जानकारी नहीं थी। इससे इस घटनाक्रम की पारदर्शिता और वैधता पर संदेह और गहराता है।
सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर तंज
UBT के मुखपत्र ने सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सामना का कहना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद न तो उनकी राजनीतिक काबिलियत के आधार पर मिला और न ही लंबे अनुभव के कारण। संपादकीय में तंज कसते हुए लिखा गया है कि यह फैसला पूरी तरह सत्ता के अंकगणित और अंदरूनी जोड़तोड़ का नतीजा है।
लेख में यह भी दावा किया गया है कि शरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि परिवार को भी इस शपथ की पूर्व जानकारी नहीं थी, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहराता है।
NCP की स्थिति और फडणवीस का नियंत्रण
सामना के संपादकीय में NCP की मौजूदा हालत को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई है। इसमें कहा गया है कि पार्टी की “नाव का कैप्टन अब नहीं रहा” और फिलहाल इसका नियंत्रण देवेंद्र फडणवीस के हाथ में है। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि NCP अब स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं रह गई है। लेख में यह भी संकेत दिया गया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर भ्रम है और सत्ता में बने रहने के लिए समझौते किए जा रहे हैं, जिससे NCP की वैचारिक पहचान कमजोर हो रही है।
बेहद घटिया राजनीति का आरोप
संपादकीय के अंत में सामना ने मौजूदा राजनीतिक हालात को “बेहद घटिया राजनीति” करार दिया है। संपादकीय में कहा गया है कि सत्ता की लालसा ने संवेदनशीलता, संस्कृति और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है, और यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत है। सामना ने इशारों में यह भी कहा कि आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखेगा। उनका मानना है कि पूरा घटनाक्रम केवल पद और नियंत्रण की लड़ाई बनकर रह गया है, जिसमें जनता और मूल्यों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।





