नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अनोखा गठबंधन कर लिया है। जहां कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा ने सीधे कांग्रेस से हाथ मिलाकर स्थानीय स्तर पर सत्ता हासिल करने की तैयारी कर ली है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।
गठबंधन को अंबरनाथ विकास अघाड़ी नाम दिया गया है
इस गठबंधन को अंबरनाथ विकास अघाड़ी नाम दिया गया है। हालांकि, शिंदे सेना इस फैसले से काफी नाराज है। शिवसेना शिंदे समूह ने भाजपा-कांग्रेस गठबंधन को “अभद्र युति” करार दिया और आरोप लगाया कि भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर उन्हें पीठ में छुरा घोंपा है। शिंदे समूह के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर शिवसेना को नुकसान पहुँचाया।
अंबरनाथ को शिंदे सेना का गढ़ माना जाता है
अंबरनाथ को शिंदे सेना का गढ़ माना जाता है। हाल ही में हुए नगर परिषद चुनाव में शिंदे सेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से थोड़ी दूर रह गई। शिंदे सेना उम्मीद कर रही थी कि बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय बीजेपी ने कांग्रेस से गठबंधन किया और सत्ता में आ गई।
”बीजेपी और शिवसेना विभिन्न स्तरों पर गठबंधन में हैं”
सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह पूरी तरह BJP का सवाल है। कई सालों से बीजेपी और शिवसेना विभिन्न स्तरों पर गठबंधन में हैं। अंबरनाथ में शिवसेना ने अच्छा विकास कार्य किया है। अब जो भी निर्णय होगा, विकास की राजनीति के आधार पर लिया जाएगा।
इस गठबंधन ने राज्य के महागठबंधन में तनाव भी बढ़ा दिया है
इस गठबंधन ने राज्य के महागठबंधन में तनाव भी बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन मंजूर नहीं है और लोकल स्तर पर निर्णय दुरुस्त किया जाएगा। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चेतावनी दी कि कोई भी स्थानीय नेता बीजेपी के साथ गठबंधन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा-कांग्रेस गठबंधन ने राजनीतिक खेल को नया मोड़ दे दिया है। शिवसेना शिंदे समूह का गुस्सा, मुख्यमंत्री और कांग्रेस का सख्त रुख इस गठबंधन को लेकर आने वाले समय में और बड़े राजनीतिक तनाव का संकेत देता है।




