नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने हालिया ‘वोट दो, फंड मिलेगा’ वाले विवादित बयान पर सोमवार (24 नवंबर) को परभणी जिले के जिंतुर में सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह आचार संहिता (Model Code of Conduct) का सम्मान करते हैं और सार्वजनिक कामकाज के दौरान कभी-कभी अनजाने में भूल हो सकती है। विपक्ष द्वारा घेरे जाने और माफी की मांग के बीच, अजित पवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी साथ मिला, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से डिप्टी सीएम का बचाव करते हुए फंड को लेकर किसी भी तरह के भेदभाव से इनकार किया।
”आरोपों के बावजूद मैं किसी का ऋणी नहीं”
मालेगांव नगर पंचायत चुनाव प्रचार (21 नवंबर) में अजित पवार ने कहा था कि यदि जनता उनके उम्मीदवारों को चुनेगी तो फंड की कमी नहीं होगी, लेकिन यदि उन्हें ‘नकार’ दिया गया, तो वह भी नकार देंगे। जिंतुर में उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं आचार संहिता को समझता हूं और इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुझ पर पिछले पैंतीस वर्षों में तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मैं जानता हूं कि मैं किसी का ऋणी नहीं हूं। उन्होंने यह भी कहा कि, मीडिया उनकी हर बात पर कड़ी नजर रखता है और किसी भी मुद्दे को तुरंत उनसे जोड़ देता है।
गठबंधन का बचाव: CM फडणवीस ने क्या कहा?
डिप्टी सीएम अजित पवार के बयान पर मचे राजनीतिक बवाल के बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार (23 नवंबर) को सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया। सीएम फडणवीस ने फंड को लेकर भेदभाव की बात को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि, सरकार का लक्ष्य सभी क्षेत्रों का समान विकास करना है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि, भले ही उनके सहयोगी (अजित पवार) ने ऐसा कहा हो, लेकिन यह उनका इरादा नहीं था और सरकार कभी भी इस तरह का भेदभाव नहीं करेगी।
विकास का आश्वासन और चुनाव आयोग से मांग
विवादों के बीच अजित पवार ने जिंतुर चुनाव से पहले क्षेत्र के विकास का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों से प्रभावित होने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए यह आरोप भी लगाया कि कुछ गैर-सरकारी समूह मतदाताओं के घर जाकर निजी जानकारी मांग रहे हैं, और कानून सबके लिए समान होना चाहिए।
अजित पवार ने चुनाव से पहले क्षेत्र के विकास कार्यों का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कुछ गैर-सरकारी समूहों पर मतदाताओं से निजी जानकारी इकट्ठा करने का आरोप लगाया।




