नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । नगर विकास विभाग की राजपत्र अधिसूचना के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की राजनीतिक रणनीति में अचानक बदलाव देखने को मिला है। अधिसूचना जारी होते ही शिंदे गुट के नगरसेवकों की एंट्री और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया टल गई। सूत्रों के अनुसार, नवनिर्वाचित नगरसेवकों को सोमवार को कोंकण भवन जाकर अपने गुट के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन राजपत्र अधिसूचना जारी होते ही इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। और शिंदे गुट ने फिलहाल इस प्रक्रिया से दूरी बनाना ही उचित समझा है।शिंदे गुट ने अपने नवनिर्वाचित नगरसेवकों की आधिकारिक एंट्री और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है।
शिंदे गुट किसी बड़े राजनीतिक मोड़ या नई चाल की तैयारी में है?
इस बदलाव के पीछे जो सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है, वह है शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों के मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी किसी भी कदम को जल्दबाजी में नहीं उठाना चाहती और आगे की रणनीति पर पूरी तरह सतर्कता बरत रही है। दस्तावेजों को पार्टी के पास रखे जाने से यह भी संभावना जताई जा रही है कि शिंदे गुट किसी बड़े राजनीतिक मोड़ या नई चाल की तैयारी में है।
सभी शिवसेना नगरसेवकों को चेकआउट करने के निर्देश दिए
इसी बीच मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में ठहरे हुए नगरसेवकों को मंगलवार सुबह 10 बजे तक चेक-आउट करने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद वे अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए
बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे सभी शिवसेना नगरसेवकों को चेकआउट करने के निर्देश दिए गए। चौथे दिन आखिरकार सभी 29 नगरसेवकों को होटल से छुट्टी मिल गई। ये सभी पार्षद 17 जनवरी से होटल में ठहरे हुए थे, लेकिन अब अचानक उन्हें वहां से वापस बुला लिया गया। राजनीतिक गलियारों में यह कदम भी कदम पीछे हटाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, नवी मुंबई के बेलापुर में गुट गठन (ग्रुप फॉर्मेशन) के लिए जो कार्यक्रम तय था, वह भी फिलहाल रद्द कर दिया गया है। इस फैसले से साफ है कि शिंदे गुट अंदरखाने रणनीति पर फिर से विचार-विमर्श कर रहा है और किसी भी घोषणा से पहले सभी विकल्पों का परीक्षण कर रहा है।
अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद शिवसेना की आगे की राजनीतिक दिशा और रणनीति साफ हो सकती है। पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन आने वाले घंटों में कोई बड़ा फैसला सामने आने की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है अब देखंना होगा कि, क्या शिंदे गुट किसी नए मोड़ पर जाएगा या फिर यह सिर्फ रणनीतिक इंतजार है। यह सवाल अब दिल्ली बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा।





