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पिछले सिविल सर्जन ने खर्च कर दिया समूचा बजट, मरीजों को घर से लाना पड़ रहा कूलर-पंखा

गुना, 08 अप्रैल (हि.स.) । अशोकनगर के पिछले सिविल सर्जन द्वारा समय से पूर्व ही समूचा बजट खर्च कर देने से हलाकान कर देने वाली गर्मी में जिला अस्पताल में आकर इलाज कराने वाले मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है। यहां प्रबंधन द्वारा भर्ती मरीजों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। मरीज भगवान भरोसे बिस्तर पर पड़े हैं, जो स्थानीय हैं व सक्षम हैं। वह तो अपनी व्यवस्था स्वयं जुटा लेते हैं लेकिन दूर-दराज के अंचल से आने वाले व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग वाले मरीजों को अस्पताल की अव्यवस्था जीवित रहते ही नरक भोगने का अनुभव दे रही है। आसमान से आग बरस रही थी और अस्पताल में भर्ती मरीज शारीरिक वेदना के साथ-साथ गर्मी से निजात पाने की मशक्कत में थे। हमारी टीम ने अलग-अलग वार्डों में जाकर देखा तो अधिकांश में या तो पंखे बन्द थे या फिर धीरे-धीरे चल रहे थे। किसी भी वार्ड में कूलर नहीं था, सभी कूलर डॉक्टर्स व नर्सिंग कक्षों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जबकि जिला अस्पताल में अक्सर जनप्रतिनिधि, समाजसेवक व समाजसेवी संगठन कूलर-पंखा दान करते हैं। मरीजों की सुविधा के लिए दान स्वरूप आने वाले यह साधन यहां कार्यरत स्टाफ के कमरों में सजे हैं। दृश्य-1: एक वृद्ध महिला अपने बीमार पति के पास बैठी तौलिया से बार-बार हवा कर रही थी। उसने बताया कि तीन दिन से भर्ती हैं। पति को टाइफाइड हुआ है। पंखा नहीं चलने से गर्मी लगती है। तौलिया से हवा करती हैं और नींद आ जाने पर उसे हल्का गीला कर पति को ओढ़ा देती हैं। दृश्य-2: मुंह के छालों का इलाज कराने आए प्रेमचंद दांगी पहले दिन तो गर्मी में ही भर्ती रहे। बुधवार को बेटे को फोन कर घर से टेबिल फैन मंगवाया। उन्होंने बताया कि नर्सों से पंखा चालू करने की कहते हैं तो वह खराब होने की बात कह देती हैं। दृश्य-3: एक मरीज पथरी के ऑपरेशन के बाद बिस्तर पर है। पूछने पर नाम तो नहीं बताया लेकिन उसके पैरों के सामने रखा छोटा से कूलर पता चलता है कि मरीज स्थानीय है। कूलर घर से मंगाया है क्योंकि गर्मी के साथ मक्खियां भी परेशान करती हैं। इनका कहना: ‘कुछ कूलर खराब हैं, उन्हें सुधरवाने का ठेका दे दिया है। कुछ लोग मन से कूलर-पंखा घर से ले आते हैं। मेरा काम कमियों की रिपोर्टिंग करना है बाकि काम सिविल सर्जन सर को करना है।’ डॉ. प्रशांत दुबे, प्रबंधन अधिकारी जिला अस्पताल ‘जब मेरे पास चार्ज आया तो पिछले वर्ष का बजट पूरी तरह खत्म हो गया था। मैंने नए बजट से कुछ कूलर और कुछ रोगी कल्याण समिति से खरीदने के निर्देश दिए हैं। सोमवार-मंगलवार तक व्यवस्था हो जाएगी।’ डॉ. एसएस छारी, सिविल सर्जन जिला अस्पताल हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक

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