अशोकनगर,16 मई(हि.स.)। कोरोना संक्रमण के बाद अब दुनिया भर में ब्लैक फंगस प्राण घातक बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसा ही एक मामला यहां भी आने पर ब्लैक फंगस चिंता का विषय बन गया है। कोरोना संक्रमण के बाद कैसे फैलता है ब्लैक फंगस और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है? इस संबंध में जिले के वरिष्ठ चिकित्सक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके जैन ने हिन्दुस्थान समाचार को एक चर्चा में बताया कि ब्लैक फंगस कैसे फैलता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है। डॉ. डीके जैन का कहना है कि कोरोना संक्रमित शुगर के मरीज को उपचार के दौरान लगातार ऑक्सीजन के लिए मुंह पर मोयसर लगाये जाने से मुंह पर नमी जम जाती है जिससे ब्लैक फंगस की संभावना बढ़ जाती है। उनका यह भी कहना है कि इसके साथ ही लम्बे समय तक स्टेरॉयड लेने से भी फंगस की संभावना बढ़ती है। इसके बचाव को लेकर उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान स्टेरॉयड की मात्रा धीरे-धीरे कम कर देना चाहिए और अगर ऐंटी फंगस दवा पहले ही शुरू कर दी जाए तो मृत्यु से बचा जा सकता है। सामान्य व्यक्ति को भी हो सकता है फंगस : एक सवाल के जवाब में डॉ. डीके जैन ने कहा कि जिस प्रकार कोरोना संक्रमित मरीज से दूरी बनाकर रहने की आवश्यकता है, उतनी ही दूरी ब्लैक फंगस के मरीज से दूरी बनाकर रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि फंगस संक्रमित मरीज के सम्पर्क में आने से फंगस फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण से ब्लैक फंगस संक्रमित के सम्पर्क में आने वाले व्यक्ति को फ्लूकॉन लेना चाहिए, जिससे खतरा कम हो जाता है। ब्लैक फंगस के बारे एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए डॉ. डीके जैन का कहना है कि ब्लैक फंगस उन सामान्य व्यक्ति को भी हो सकता है जो सोशल मीडिया पर आ रही जानकारी के प्रभाव में स्टेरॉयड ले रहे हैं, बिना चिकित्सकीय परामर्श के स्टैरॉयड लेने पर भी ब्लैक फंगस की संभावना बढऩे का खतरा रहता है, जिस कारण बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न ली जाए। उन्होंने पुन: कोरोना संक्रमित और ब्लैक फंगस के बचाव के बारे में बताया कि कोरोना संक्रमित मरीज को 14 दिन उपचार के बाद सात और दिन एकांतवास में रहना चाहिए ताकि आगे की बीमारी से बचा जा सके। हिन्दुस्थान समाचार/ देवेन्द्र ताम्रकार




