भोपाल, 11 अप्रैल(हि.स.)। कोरोना संकट का सामना सब को मिलकर करना है। सबके साथ और सहयोग से कोरोना पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। संकट का सामना कौशल और रणनीति बना कर किया जाए। यह भी देखा जाए कि संक्रमण से बचाव के प्रयासों से छात्रों के भविष्य में बाधाएं उत्पन्न नहीं हों। यह कहना है प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव का । वे रविवार को विश्वविद्यालय के कुलपतियों से ऑनलाइन बैठक में बातचीत कर रहे थे। जिसमें कि इस कोरोना संकट में विश्वविद्यालयों का समाज एवं विद्यार्थियों के बीच क्या योगदान हो सकता है, इस पर उन्होंने विशेष तौर से यहां अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों की परीक्षाएं जिनके बाद विद्यार्थियों को अखिल भारतीय परीक्षाओं में सम्मिलित होने की पात्रता होती है, ऐसी परीक्षाओं के संबंध में अन्य राज्यों के निर्णयों और छात्रों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रख कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों को ग्रामीण अंचल में वैक्सीनेशन और जन जागृति के प्रयासों में सक्रियता के साथ सहयोग के लिए प्रेरित किया। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के बीच मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रों के लिए परीक्षा का नया टाइमटेबल पहले ही जारी कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने इस बारे में फिर बताया कि अप्रैल के महीने में जो भी परीक्षाएं आयोजित की जानी थीं उन्हें अब मई में शुरू किया जाएगा। स्नातक अंतिम वर्ष और स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं छात्रों को भौतिक (फिजिकल) रूप से परीक्षा केंद्रों में उपस्थित होकर ही देनी होंगी। यह परीक्षाएं मई के महीने में आयोजित की जाएंगी। हालांकि सरकार ने छात्रों की परेशानी को देखते हुए यह तय किया है कि जिन छात्रों को भौतिक रूप से परीक्षा देने केंद्रों पर आना होगा उनके लिए विशेष रूप से परीक्षा के दौरान हॉस्टल की व्यवस्था की जाएगी जिससे उन्हें परीक्षा देने में परेशानी ना हो। गौरतलब है कि इस साल स्नातक अंतिम वर्ष के 4.3 लाख और स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के 1.72 लाख परीक्षार्थी प्रदेश के आठ विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल होंगे। स्नातक प्रथम और द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं ओपन बुक पद्धति से जून के महीने में आयोजित की जाएंगी। इसमें परीक्षार्थी द्वारा अपने घर पर ही रहकर परीक्षा देने की व्यवस्था रहेगी और पास के संग्रहण केंद्र में उत्तर पुस्तिका जमा कर सकेंगे। वहीं, स्नातक प्रथम वर्ष में 5.3 लाख, स्नातक द्वितीय वर्ष में 5.25 लाख, स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर में 1.35 लाख परीक्षार्थी प्रदेश के आठों विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल होंगे। वर्तमान में आठ सरकारी विश्वविद्यालयों में 665 परीक्षा केंद्र के साथ आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त सह-परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है। बैठक के अंत में राज्यपाल के अपर सचिव आर.के. कौल ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन किया जाएगा। इस अवसर पर समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों के द्वारा कोविड वैक्सीनेशन और जन जागृति के प्रयासों की जानकारी दी गई। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. मयंक चतुर्वेदी
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