मंदसौर, 03 अप्रैल (हि.स.)। किराना बाजार में इन दिनों दाल के भाव कुछ कम होने से घर खर्च में राहत नजर आने लगी है, लेकिन तड़का लगाना और महंगा हो गया है। मार्च से तुलना करें तो दाल के थोक भावों में 4 से 10 रुपए किलो तक की कमी आई है, जबकि सोयाबीन तेल के भावों तेजी है। 31 मार्च को थोक भाव 133 रुपए किलो थे, जो 2 अप्रैल को 137 रुपए किलो पर पहुंच गए। ये सोया तेल के सर्वोच्च भाव हैं। बाजार में दलहन (दाल) की नई उपज आने और मांग के अनुरूप पूर्ति होने से भाव में नरमी है, जिस प्रकार से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है और लॉकडाउन की संभावना बढ़ रही है। उससे लगा था कि भाव स्थिर रहने की जगह बढ़ेंगे, जबकि इसके उलट भाव में नरमी देखी जा रही है। किराना व्यापारियों का कहना है कि लॉकडाउन से भाव पर ज्यादा फर्क नहीं पढ़ता है। फिलहाल दलहन की नई उपज आने और मांग अनुरूप पूर्ति होने से भाव बढ़ने की संभावना कम है, शहर में सबसे ज्यादा खपत तुवर दाल की है। इसके थोक में भाव पिछले माह की तुलना में 3-4 रुपए प्रतिकिलो की कमी आई है, जबकि सबसे ज्यादा कमी उड़द दाल में 10 रुपए प्रतिकिलो की आई है। चना, मूंग व मसूर की दालों में ज्यादा अंतर नहीं आया है। दूसरी तरफ सोयाबीन तेल के थोक भाव पिछले महीने तेजी के साथ स्थिर थे। मार्च की बात करें तो 1 मार्च को थोक के जो भाव 122 रुपए प्रति किलो थे, वह 10 मार्च तक 134 रुपए प्रतिकिलो तक भाव पहुंच गए थे। उसके बाद से भाव इसके आस-पास रहे और मार्च खत्म होते ही भाव ने तेजी का रुख ले लिया। किराना व्यापारी शरद धीग ने हिस को बताया कि सोयाबीन की कमी पहले से है और आगे से आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने के कारण भावों में दो दिन से तेजी है। शुक्रवार को 137 रुपए प्रति किलो के भाव खुले थे। 31 मार्च तक 15 किलो सोयाबीन तेल का डिब्बा (टीन) 1995 से 2000 रुपए में का था, वह शनिवार को 2050 से 2055 रुपए का हो गया है। हिन्दुस्थान समाचार/अशोक झलौया/राजू




