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नर्मदा के आंचल में जलस्तर और हरियाली बढ़ाने लगाए 16 हजार साल के पौधे

विश्व पर्यावरण दिवस विषेश अनूपपुर, 05 जून (हि.स.)। जीवनदायिनी नर्मदा नदी के उद्गम के साथ मैकल पर्वतीय क्षेत्र और मां नर्मदा मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के कारण यह पर्यटन स्थली भी है। यहां की वादी मनोहारी, को भी सुरक्षित रखने वनीय क्षेत्र का होना अति आवश्यक है। जिले की सात वनपरिक्षेत्र में अमरकंटक वनपरिक्षेत्र पर्यावरण की दृष्ट से अति महत्वपूर्ण स्थली मानी गई है। हाल के दिनों में वनोन्मूलन के कारण नर्मदा के गिरते जलस्तर के साथ अमरकंटक के पर्यावरण भी इसका असर दिखने लगा। हमेशा नमीदार हवाओं के आगोश में रहने वाली अमरकंटक की वादियों में प्रत्येक वर्ष तापमान में बढ़ोत्तरी होनी लगी। विशेषज्ञों ने इस वातावरण परिवर्तन के लिए वनोन्मूलन होना बताया। जिसे देखते हुए शासन स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाते हुए वनों को सरंक्षित किए जाने के प्रयास किए गए। इसमें अब वनविभाग ने 8 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले अमरकंटक रेंज पिछले पांच सालों में 5 लाख 59 हजार 805 विभिन्न जलस्तर बढ़ाने वाले पौधों के साथ स्थानीय आषधियुक्त पौधों की रोपाई की है। इस प्रकार अब अमरकंटक वनपरिक्षेत्र में 5.60 लाख नए पौधों का कुनबा बढ़ है। हालांकि वनविभाग द्वारा अभी 385 हेक्टेयर में यूके लिप्ट्स की कटाई कर नए पौधे लगाएं जाने शेष है, जिसे देखकर यह कहा जा सकता है कि आगामी आने वाले 10 वर्षो में अमरकंटक का नर्मदा रीजन पुन: हरा भरा और जलस्तर युक्त होगा। उप वनमंडलाधिकारी मान सिंह मरावी बताते हैं कि अमरकंटक वनपरिक्षेत्र के नर्मदा रीजन को इसके लिए चयनित किया गया है। जिसमें नर्मदा के आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधों का रोपण किया जाना है। 2017 से अभियान आरम्भ हुआ। लेकिन इसके बाद वनविभाग द्वारा प्रत्येक साल सर्वेक्षण के आधार पर पिछले साल लगाए गए पौधों की जीवित अवस्था का गणना कर मृत पौधों के स्थल पर नए पौधों का रोपण कर नए साल में अन्य हिस्सों में पौधारोपण की नीति को अपनाया है। जिसका परिणाम है कि पिछले पांच सालों में वनविभाग द्वारा 5 लाख 59 हजार 805 पौधे लगाएं गए हैं। इनमें 85-90 प्रतिशत पौधे जीवित अवस्था में हैं। तथा मृतावस्था के पौधों के स्थान पर नए पौधों को रोपित किया जा रहा है। उप वनमंडलाधिकारी मान सिंह मरावी बताते हैं कि अमरकंटक को आगे इको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, पर्यटकों को लुभाने मप्र पर्यटन विकास विभाग द्वारा लगाए जाने वाले संसाधनों को देखते हुए अधिक से अधिक वनों की आवश्यकता थी। जिसे देखते हुए 2017 से प्रत्येक साल रणनीति के तहत नर्मदा रीजन सहित राजेन्द्रग्राम रीजन को हरा भरा बनाने का प्रयास किया गया। राजेन्द्रग्राम रीजन में 3 लाख पौधे लगाए गए हैं। जहां 2017 2 लाख 500 पौधे, 2018 1 लाख 15 हजार पौधे,2019 1 लाख 35 हजार 250 पौधे, 2020 1 लाख 9 हजार 55 पौधे लगायें गयें। उप वनमंडलाधिकारी ने बताया कि अमरकंटक वनपरिक्षेत्र के नर्मदा रीजन में साल, करंज, पीपल, बरगद, अमलास, चिरौंत, बांस, जामुन, कहुआ, आंवला, हर्रा, बहेरा, दहिमना सहित अन्य स्थानीय औषधियुक्त पौधे हैं। इनमें साल के साथ बरगद, जामुन और कहुआ को अधिक प्राथमिकता दी गई। पानी के साथ रहने वाले खास पौधे जैसे जामुन, कहुआ को नमीदार स्थानों पर लगाया गया है। साल को सर्वाधिक प्राथमिकता नर्मदा की सिकुड़ती जलधारा को साल द्वारा ही विस्तारित रूप प्रदान किया जा सकता है, पर्यावरणविदों की सलाह पर अमरकंटक में साल के पौधों की रोपाई को अधिक प्राथमिकता दी गई है। पिछले पांच सालों में अमरकंटक वनपरिक्षेत्र में लगभग 16 हजार से अधिक साल के पौधे लगाए गए हैं। जबकि पीपल, बरगद को अलग अलग स्थानों पर 150-200 की संख्या में लगाया गया है। इसके अलावा बांस को भी अधिक संख्या में लगाए गए हैं। उप वनमंडलाधिकारी ने बताया कि नर्मदा रीजन को फोकस कर अधिक से अधिक पौधारोपण की रणनीति है। पांच साल में 5 लाख से अधिक पौधों को लगाया गया, जिनमें 90 फीसदी से अधिक जीवित है, जहां मृत हुए हैं, उनका सर्वेक्षण के अनुसार नए पौधे लगाए जा रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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