शहर में तैराकी व राहत बचाव कार्य प्रशिक्षण के लिये दूसरा स्थान नहीं उज्जैन,03 जून(हि.स.)। संभागीय होमगार्ड मुख्यालय द्वारा प्रतिवर्ष संभाग के होमगार्ड सैनिकों को बारिश के पूर्व बाढ़ के बीच राहत एवं बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस वर्ष 1 जून से शिप्रा नदी में 15.15 जवानों को तैराकी के अलावा अन्य प्रशिक्षण शुरू हो चुका है लेकिन नदी के पानी में तैरकर प्रशिक्षण लेने वाले सैनिक खुजली और त्वचा संबंधी बीमारी की शिकायत कर रहे हैं। शिप्रा नदी में जनवरी माह में पर्व स्नान के लिये नर्मदा का पानी छोडा गया था, तब से लेकर आज तक नदी में वही पानी स्टोर है जो मैला और बदबूदार हो चुका है क्योंकि नदी में लगातार नालों का दूषित पानी मिलता रहता है। दो दिनों पहले कर्कराज मंदिर के सामने सीवरेज पाइप लाइन कार्य की वजह से छोटे पुल के पास स्थित स्टापडेम के गेट खोलकर रामघाट, सुनहरी घाट तक स्टोर पानी को आगे बढाया गया। इस कारण पानी का लेवल वर्तमान में 3 फीट नीचे चला गया है। दत्त अखाडा घाट की ओर होमगार्ड सैनिकों को तैराकी, राहत एवं बचाव आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 15-15 सैनिकों के समूह में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान होमगार्ड सैनिक 2 से 3 घंटे नदी में रहते हैं। उनका आरोप है कि नदी का पानी दूषित होने के कारण शरीर पर खुजली और त्वचा संबंधी रोग हो रहे हैं। प्रशिक्षण के लिये जगह की तलाश होमगार्ड कमांडेंट संतोष जाट ने चर्चा में बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नदी में उतरने वाले जवानों को खुजली व त्वचा संबंधी परेशानी हो रही है। लेकिन शहर के आसपास तैराकी व राहत बचाव प्रशिक्षण के लिये नदी, तालाब, डेम जैसे स्थान नहीं हैं। गंभीर डेम में पानी का लेवल कम हो चुका है और तालाबों की भी यही स्थिति है। मजबूरी में जवानों को शिप्रा नदी में प्रशिक्षण दिया जा रहा है । हिंदुस्थान समाचार/ललित ज्वेल




